
यह प्रेरक बाल कहानी कोरोना काल में ऑक्सीजन के महत्व को समझते हुए तीन बच्चियों द्वारा किए गए पौधारोपण के प्रयास को दर्शाती है। उनकी मेहनत और पर्यावरण-प्रेम से पूरा गाँव हरा-भरा, स्वच्छ और खुशहाल बन जाता है।
- पौधों ने बदल दी गाँव की तस्वीर
- बच्चियों ने दिया हरियाली का संदेश
- वृक्ष हैं तो कल है
- हरियाली से खुशहाल हुआ गाँव
कोरोना काल में ऑक्सीजन की भारी तंगी के कारण शहर में अफरा-तफरी मची हुई थी। ऑक्सीजन सिलेंडर हेतु हर कोई दौड़ रहा था। ऐसे समय में भी लोगों ने ऑक्सीजन सिलेंडर ब्लैक में बेचकर भारी मुनाफा कमाने से भी परहेज नहीं किया। ऐसे वक्त में वंदना, चाँदनी और सायली ने ऑक्सीजन का महत्व समझा और उन्होंने एक टीम बनाकर पौधारोपण करना शुरू किया।
वे रोज सुबह-शाम पौधारोपण करतीं, गड्ढा खोदतीं और पौधों की नियमित देखभाल करतीं, जिसके कारण आज वे पौधे वटवृक्ष बन गए। आज गाँव में लोगों को शुद्ध व ताजी हवा मिल रही है। अपितु ताजे पुष्प, फल व छाया हर दो घरों के बाद मिल रही है। बच्चियों की मेहनत, लगन, निष्ठा व सूझ-बूझ के कारण पूरा गाँव हरा-भरा नजर आ रहा है। वहीं हरियाली के कारण हर कोई प्रसन्नचित्त, मस्त और खुशहाल नजर आ रहा है। वृक्ष न केवल वृक्ष ही हैं, अपितु धरती के आभूषण भी हैं, जिनकी रक्षा करना हम सभी का नैतिक दायित्व है। वृक्ष हैं तो कल है।
— सुनील कुमार माथुर
सदस्य, अणुव्रत लेखक मंच एवं
स्वतंत्र लेखक व पत्रकार, जोधपुर, राजस्थान









