कौन लगाये फाग रंग

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मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

कदम्ब की डाल बैठ पपीहा कूक रहा
आया वसन्त भॅंवरों का मन डोल रहा

रंग-बिरंगी तितलियों की मुस्कान मनोहर
फूलों का चुरा पराग मधुरुपी हुआ श्रृंगार

चल रही वसंती बयार, हरेभरे खेत झूम रहे
कृषक भर जाएगी झोली, गीत वसंती गा रहे

मन्द – मन्द सुगंध प्रिये की जुल्फें फैला रहीं
सब दिशाएं रंग पीत लेकर यौवनता ला रहीं

फूल उठी कचनार पाकर सुखद संदेश
रातभर रोई चकोरी छोड़ गये प्रिय स्वदेश

बिन प्रीतम के सूना – सूना फाग लगे
मिलन की आस में अखियां रोज जगें

बीतीं मधुमय रातें, छोड़ प्रिय जा बसे परदेश
मन में बसीं सुखमय सरस रसभरी यादें शेष

आया वसंत….. प्रिय तुम भी आ जाओ
कौन लगाये फाग रंग, प्रिय तुम्हीं बताओ


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

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मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

लेखक एवं कवि

Address »
ग्राम रिहावली, डाकघर तारौली गुर्जर, फतेहाबाद, आगरा, (उत्तर प्रदेश) | मो : 9876777233

Publisher »
देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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