पेड़-पौधों का हमारे जीवन में महत्व

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सुनील कुमार

पेड़-पौधे का हमारे जीवन में बड़ा ही महत्व है। या यूं कहें कि पेड़-पौधों के बिना धरा पर जीवन संभव ही नहीं है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। हमारी धरा पर पेड़-पौधों की हजारों- लाखों प्रजातियां विद्यमान हैं। इन्हीं पेड़-पौधों से हम अपने दैनिक जीवन की विभिन्न आवश्यकताओं को पूर्ति करते हैं। विभिन्न प्रकार के फल- फूल, ईंधन, औषधियां, व प्राणदायिनी वायु हम वृक्षों से ही तो प्राप्त करते हैं।

कुछ पेड़-पौधे वर्षों तक हरे-भरे रहते हैं‌। उनसे सामाजिक और धार्मिक जुड़ाव होने के साथ ही स्वास्थ्य लाभ भी अधिक है। बरगद,पीपल और नीम ऐसे ही वृक्ष हैं, जो कई सालों तक पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं। इसके अलावा लोगों को घनी धूप में छांव देकर शीतलता प्रदान करते हैं।

बरगद हमारे देश का राष्ट्रीय वृक्ष है। इसे वटवृक्ष भी कहते हैं।हिंदू मान्यताओं में इस पेड़ का अधिक महत्व है। यह पांच सौ साल से भी अधिक समय तक हरा- भरा रह सकता है। इसकी छाया बहुत घनी व शीतल होती है। पीपल का वृक्ष भी दीर्घायु होता है। बहुत अधिक पत्तियां होने के कारण यह भी घनी छाया व शीतल वायु देता है।स्वास्थ्य के लिए इसे अत्यंत उपयोगी माना गया है।पीलिया,रतौंधी, मलेरिया, दमा ,खांसी और सर्दी होने पर इसका प्रयोग इलाज के तौर पर किया जाता है।

इसके अलावा इनसे आयुर्वेदिक दवाएं भी बनाई जाती हैं। यह पेड़ दिन और रात, दोनों ही समय ऑक्सीजन देता है।हिंदू और बौद्ध धर्म में इस पेड़ का बड़ा महत्व है। भगवान बुद्ध ने पीपल के पेड़ के नीचे ही ज्ञान प्राप्त किया था। नीम का पेड़ भी कई वर्षों तक हरा-भरा रह सकता है।इसकी पत्तियों और फूल को पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में खानपान में शामिल किया जाता है। यह भूमि को बंजर होने से रोकता है।इससे विभिन्न प्रकार के स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।

इसका प्रयोग विभिन्न प्रकार से दवा उत्पादन में किया जाता है। आम, अमरूद, जामुन, बेल,आंवला जैसे वृक्षों से प्राप्त फलों का सेवन हमें विभिन्न प्रकार के रोगों से बचाते हैं। हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। जिससे हम स्वस्थ सुखी जीवन यापन करते हैं। सार रूप में हम कह सकते हैं कि पेड़-पौधों के बिना जीवन संभव ही नहीं है।

एक व्यक्ति सांस लेने में प्रतिदिन तीन ऑक्सीजन सिलेंडर जितनी ऑक्सीजन गैस इस्तेमाल करता है।एक ऑक्सीजन सिलेंडर की कीमत लगभग सात सौ रुपए होती है। इस प्रकार एक आदमी प्रतिदिन इक्कीस सौ रुपए का ऑक्सीजन इस्तेमाल करता है। इस तरह यदि कोई व्यक्ति 65 वर्ष जीता है, तो वह लगभग पांच करोड़ रुपए का ऑक्सीजन गैस इस्तेमाल कर चुका होता है। जो ईश्वर हमें पेड़ पौधों के माध्यम से जीवन सुरक्षित रखने के लिए मुफ्त देता है।

इसके अतिरिक्त दैनिक जीवन में हम जो फल- फूल, ईधन, दवा, इमारती लकड़ी आदि का इस्तेमाल करते हैं वह किसी न किसी पेड़ से ही प्राप्त होता है। पेड़-पौधे के बिना इस धरा पर जीवन असंभव है।अतःअपने पर्यावरण को सुरक्षित बनाए रखने के लिए हम सभी को अपने जीवन में अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर उनके संरक्षण का संकल्प लेना होगा।


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

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सुनील कुमार

लेखक एवं कवि

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ग्राम : फुटहा कुआं, निकट पुलिस लाइन, जिला : बहराइच, उत्तर प्रदेश | मो : 6388172360

Publisher »
देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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