
यह आलेख विश्वास, संवाद, आत्मविकास और जीवन मूल्यों के महत्व पर केंद्रित है। लेखक ने आधुनिक जीवन में रिश्तों की बदलती स्थिति, सफलता के प्रति लोगों की मानसिकता, क्रोध से दूरी और सकारात्मक सोच के माध्यम से संतुलित जीवन जीने का संदेश दिया है।
- विश्वास से बनते हैं रिश्ते
- संवाद ही जीवन की डोर
- मौन, ज्ञान और जीवन का संतुलन
- बदलते समय में जीवन के सूत्र
सुनील कुमार माथुर
आज की दुनिया में भले लोगों की बड़ी कमी है। यही वजह है कि कोई किसी पर आसानी से विश्वास नहीं करता है। हां, अनजान आदमी पर विश्वास नहीं करे, वहां तक तो ठीक है, लेकिन आज तो अपनों पर भी विश्वास नहीं हो रहा है। यह कैसी विडम्बना है। अपने तो अपने ही होते हैं, लेकिन कोई भी आसानी से उन पर भी विश्वास नहीं कर रहा है। आज विश्वास करना भी मजबूरी हो गया है। इसलिए जीवन में कभी भी किसी का विश्वास न तोड़ें। आज की दुनिया विश्वास पर ही चल रही है। किसी ने ठीक ही कहा है कि रिश्ते और विश्वास दोनों ही मित्र होते हैं। रिश्ते रखो या न रखो, पर विश्वास जरूरी बनाए रखना, क्योंकि जहां विश्वास होता है वहां रिश्ते अपने आप बन जाते हैं।
व्हाट्सएप पर आने वाले सुविचारों, सुप्रभात के साथ आने वाली हर पंक्ति को ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए। वे महापुरुषों के प्रेरणादायक व शिक्षाप्रद कथन होते हैं, जो हमें हर दिन प्रातःकाल घर बैठे व्हाट्सएप के जरिए मिल रहे हैं, जो हमारे शुभ कर्मों का ही परिणाम है, अन्यथा इतने अनमोल वाक्य कहां देखने, सुनने व पढ़ने को मिलते हैं। ये अनमोल वचन वास्तव में अनमोल ही होते हैं। अगर इन्हें जीवन में आत्मसात कर लिया जाए, तो आपकी जिंदगी ही बदल जाएगी और आप महापुरुषों की श्रेणी तक पहुंच सकते हैं। बस जरूरत है तो आत्मसात कर उसे जीवन में उतारने और उसके अनुसार चलने की। आज सही मायने में देखा जाए, तो मालूम पड़ता है कि जिंदगी के नियम भी कबड्डी की तरह होते हैं। जैसे ही आप सफलता की लाइन की तरफ बढ़ते हैं, वैसे ही लोग आपके पैर पीछे खींचने लगते हैं, क्योंकि आपकी तरक्की, उन्नति और प्रगति को कोई भी सहन नहीं कर पा रहा है। वे ईर्ष्या से जलते हुए आपकी उन्नति को पचा नहीं पा रहे हैं।
जीवन की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान सबसे दूर होता जा रहा है। चूंकि वह धन कमाने की दौड़ में अपनी जिंदगी को मशीन की तरह बना चुका है। वह दूसरों से क्या, अपनों से भी बात नहीं कर रहा है। आज संवाद की प्रक्रिया एक तरह से ठप होती जा रही है, जिसे निरंतर बनाए रखना नितांत आवश्यक है। संवाद ही वह माध्यम है, जिसकी बदौलत हम अपने मन की बात दूसरों तक आसानी से पहुंचा सकते हैं। हमारे बड़े-बुजुर्ग कहते भी हैं कि मोती महंगे होते हैं, जो गंवाए नहीं जाते। ठीक उसी प्रकार अपने सिर्फ अपने होते हैं, जिन्हें चाहकर भी भुलाया नहीं जा सकता। इसलिए संवाद की कड़ी को बनाए रखें और ज्यादा से ज्यादा अपना कीमती समय संवाद में व्यय करें, न कि मोबाइल पर।
अज्ञान की शक्ति क्रोध है और ज्ञान की शक्ति मौन है। इसलिए व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने जीवन में कम से कम क्रोध करे। क्रोध करने में कोई बहादुरी नहीं है और न ही मान-सम्मान व प्रतिष्ठा मिलती है, अपितु अपनी ऊर्जा व्यर्थ ही बर्बाद होती है। इसलिए अपने इस अनमोल जीवन में क्रोध व अहंकार से दूर रहें और अपने मन को ज्ञान अर्जित करने में लगाइए, क्योंकि ज्ञान की शक्ति मौन है।सबकी सुनें और तभी अपनी बात रखें, जब आपका बोलना आवश्यक हो, अन्यथा मौन ही रहें। मौन हमें बिना वजह की बहस व लड़ाई-झगड़े से बचाता है। जिंदगी का यह सच है कि आज इंसान को जहां बोलना होता है, वहां वह मौन रहता है और जहां नहीं बोलना चाहिए, वहां उसकी जुबान कतरनी की तरह कच-कच चलती है, जो आपसी विवाद को जन्म देती है।
याद रखिए, जीवन में मिठास है तो पराये भी अपने हैं और जीवन में कड़वाहट है तो अपने भी पराये हो जाते हैं। हम भी वहीं हैं, संबंध भी वहीं हैं, रास्ते भी वहीं हैं। बस बदलते हैं तो समय, संजोग व हमारा नजरिया। कहने का तात्पर्य यह है कि जो व्यक्ति हर परिस्थिति में स्वयं को ढाल लेता है, वास्तव में सबसे ज्यादा सुखी वही रहता है। अपने आप को कभी भी खाली न रखें। कोई न कोई रचनात्मक कार्य करते रहिए। इससे जहां एक ओर आपका खाली समय भी पास हो जाएगा, वहीं दूसरी ओर आपको कुछ न कुछ नया ज्ञान अर्जित अवश्य ही होगा। जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव आते हैं। अतः उनसे तनिक भी न घबराएं।
जब आप में हर परिस्थिति में शांत रहने की क्षमता है, तो कोई भी बाधा आपको आपकी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। क्योंकि कुछ भी हमेशा के लिए नहीं होता है। वक्त बदलता जरूर है और उसके साथ ही साथ सब कुछ धीरे-धीरे बदलता रहता है। अतः परिवर्तन से तनिक भी न घबराएं। यह तो वक्त का पहिया है, जो निरंतर चलता रहता है। कहते हैं कि इंसान के शरीर का सबसे खूबसूरत हिस्सा उसका दिल है। अगर वह साफ नहीं है, तो चमकता चेहरा किस काम का। ठीक उसी प्रकार इंसान की कथनी-करनी में फर्क नहीं होना चाहिए। जब आपका मन साफ होगा, तो किसी भी प्रकार की बुराई, काम, क्रोध, लोभ, लालच, अहंकार जैसे अवगुण आपकी इच्छा के बिना मन में प्रवेश नहीं कर सकते।
सुनील कुमार माथुर
सदस्य अणुव्रत लेखक मंच एवं
स्वतंत्र लेखक व पत्रकार
33 वर्धमान नगर, शोभावतों की ढाणी, खेमे का कुआं, पाल रोड, जोधपुर, राजस्थान






