
उत्तराखंड की सीएम हेल्पलाइन 1905 की ताजा समीक्षा में पहली बार रसोई गैस सिलिंडर रिफिल से जुड़ी शिकायतें शीर्ष-10 समस्याओं में शामिल हुई हैं। कुल शिकायतों में वृद्धि के बावजूद कई विभागों ने निस्तारण का औसत समय कम किया है, जबकि जिलों में रुद्रप्रयाग ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और ऊधम सिंह नगर सबसे पीछे रहा।
- सीएम हेल्पलाइन पर गैस रिफिल शिकायतों में बड़ा उछाल
- शिकायत निस्तारण में रुद्रप्रयाग नंबर-1, मैदानी जिले पिछड़े
- हेल्पलाइन रिपोर्ट में बढ़ीं बिजली, पानी और गैस आपूर्ति से जुड़ी शिकायतें
- शिकायतें बढ़ीं, लेकिन विभागों ने घटाया निस्तारण का समय
देहरादून। उत्तराखंड सरकार की सीएम हेल्पलाइन 1905 की ताजा समीक्षा रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। पहली बार रसोई गैस सिलिंडर रिफिल और आपूर्ति में देरी से जुड़ी शिकायतें शीर्ष-10 प्रमुख शिकायतों की सूची में शामिल हुई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की समीक्षा बैठक में सामने आए आंकड़ों के अनुसार गैस रिफिल से संबंधित शिकायतों का निस्तारण लगभग 70 प्रतिशत दर्ज किया गया, लेकिन लगातार बढ़ती शिकायतों ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल भी खड़े किए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों में रसोई गैस रिफिल संबंधी शिकायतें कभी प्रमुख श्रेणी में नहीं थीं, लेकिन इस बार यह पहली बार शीर्ष शिकायतों में शामिल हुई हैं। इसके साथ ही बिजली कटौती, पानी की आपूर्ति, मीटर परिवर्तन, अत्यधिक बिजली बिल, राजस्व विभाग से जांच की मांग, लोक निर्माण विभाग से जुड़ी क्षेत्रीय समस्याएं और श्रम विभाग में अवैध सेवा समाप्ति जैसे मामले भी प्रमुख शिकायतों में दर्ज किए गए हैं।
शिकायतों के निस्तारण में रुद्रप्रयाग सबसे आगे
जिलावार प्रदर्शन में रुद्रप्रयाग ने सबसे बेहतर काम किया। यहां शिकायतों के सफल निस्तारण का प्रतिशत 36.71 दर्ज किया गया। दूसरे स्थान पर टिहरी गढ़वाल (36.22 प्रतिशत) और तीसरे स्थान पर पौड़ी गढ़वाल (35.76 प्रतिशत) रहे। राजधानी देहरादून का निस्तारण प्रतिशत 32.28 दर्ज किया गया। इसके विपरीत मैदानी जिलों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। नैनीताल 21.80 प्रतिशत और ऊधम सिंह नगर 21.08 प्रतिशत के साथ सूची में सबसे नीचे रहे, जिससे इन जिलों में शिकायत समाधान व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की गई।
शिकायतें बढ़ीं, लेकिन समाधान की रफ्तार भी तेज हुई
वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि सीएम हेल्पलाइन पर कुल शिकायतों की संख्या बढ़कर 2,23,001 हो गई, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह संख्या 1,68,511 थी। हालांकि शिकायतों में बढ़ोतरी के बावजूद कई विभागों ने उनके निस्तारण का समय कम करने में सफलता हासिल की है। राजस्व विभाग इसका प्रमुख उदाहरण रहा, जहां पहले शिकायतों के समाधान में औसतन 90 दिन लगते थे, वहीं अब यही कार्य औसतन 54 दिनों में पूरा किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि समयबद्ध निस्तारण से आम नागरिकों को राहत मिल रही है, हालांकि शिकायतों की बढ़ती संख्या प्रशासन के लिए नई चुनौती भी बन रही है।
इन विभागों से सबसे अधिक शिकायतें
सीएम हेल्पलाइन की रिपोर्ट के अनुसार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अंतर्गत रसोई गैस रिफिल, उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन (यूपीसीएल) से बिजली कटौती, मीटर परिवर्तन और अत्यधिक बिल, जल संस्थान व पेयजल निगम से पानी की आपूर्ति, राजस्व विभाग में जांच संबंधी आवेदन, गृह विभाग में शिकायत पत्र, लोक निर्माण विभाग की क्षेत्रीय समस्याएं तथा श्रम विभाग में अवैध सेवा समाप्ति जैसी शिकायतें प्रमुख रूप से दर्ज की गई हैं। सरकार ने संबंधित विभागों को शिकायतों के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए हैं, ताकि नागरिकों को समय पर राहत मिल सके और हेल्पलाइन की प्रभावशीलता बनी रहे।





