देवों के देव महादेव

सुनील कुमार माथुर
भारत कश्मीर से कन्या कुमारी तक एक है और यहीं वजह है कि आज देश भर में रोज कोई न कोई पर्व , तीज – त्यौहार व दिवस मनाया जाता हैं जो कौमी एकता की मिसाल हैं चूंकि सभी लोग इसमें उत्साह व उमंग के साथ भाग लेते हैं और खुशियां मनाते हैं । देवों के देव महादेव को हम भोलेनाथ के नाम से भी जानते हैं चूंकि वे इतने भोले हैं कि बोर , गाजर , दौब , पुष्प , बेलपत्र व धतूरे से पूजा करने पर भी कभी बुरा नहीं मानते हैं और इसी से प्रसन्न होकर अपने भक्तों की मनोकामना को पूरा कर देते हैं । यहीं वजह है कि हम इन्हें भोलेनाथ के नाम से पुकारते है
शिवरात्रि को शिव मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया जाता हैं और मंदिरों पर रोशनी की जाती हैं । शिवजी का अभिषेक किया जाता हैं । पूजा – अर्चना की जाती है और भजन – कीर्तन किये जातें है । अनेक शिव भक्त इस दिन भांग का सेवन भी प्रसादी के रूप में करते हैं इसलिए बडी मात्रा में भांग घोटी जाती हैं ।
शिव जी बडे ही भोले और सादगी पसंद थे । उनके जीवन से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए और उसे जीवन में आत्मसात करना चाहिए । आज मैं इस लेख के माध्यम से आपकों शिवजी के जीवन से किस तरह प्रेरणा लेनी चाहिए इस पर अपने विचार प्रस्तुत कर रहा हूं । चूंकि हमें समय के अनुसार चलना चाहिए ।
शिव ही सत्य है । शिव ही सुंदर हैं । शिव जी के सिर पर गंगा विराजमान है जो हमें यह संदेश देती हैं कि पानी की फिजूल बर्बादी को रोका जाये और अपने वाहनों को फव्वारे चलाकर नहीं अपितु पोछा मार कर साफ कीजिए और मीठे पानी की बचत कीजिए चूंकि जल हैं तो कल है।
इसी प्रकार घर की साफ सफाई के बहाने पानी को व्यर्थ न बहाये । चूंकि यह पानी मीठा है जो वर्तमान समय मे बडी दुर्लभ चीज हैं । पानी की कीमत उन लोगों से पूछिएगा जिनके घरों में पानी नहीं आता हैं । शिवजी ने अपने सिर पर गंगा को धारण कर रखा हैं इसलिए यह जल गंगा की तरह पवित्र हैं जिसे व्यर्थ बहाना केवल मूर्खता ही होगा ।
शिव जी के गले में सर्प विराजमान है जो हमें संदेश देता हैं कि तमाम बुराइयों को निगल जाओं । कभी किसी की चुगली व शिकायत या बुराई न करें । उनके ललाट पर चन्द्रमा विराजमान है जो हमें संदेश देता हैं कि चन्द्रमा की तरह उज्ज्वल व शांत एवं शीतल रहें । कभी क्रोध न करें । उनके वस्त्र हमें यह संदेश देते हैं कि हमें अपनी संस्कृति का सम्मान करते हुए शालीनता के साथ अपनी संस्कृति के अनुरूप वस्त्र पहनने चाहिए न कि पाश्चात्य संस्कृति का अनुसरण करें ।
ललाट पर तिलक यह संदेश देता हैं कि व्यक्ति को सुबह – शाम अपने ईष्ट की पूजा – आराधना करनी चाहिए । डमरू हमें हर वक्त सजग और सतर्क रहने का संदेश देता हैं तो शिवजी का त्रिशूल यह संदेश देता हैं कि हमें हमेशा न्याय पूर्वक तरीके से रहना चाहिए और हमारी शांति को कोई हमारी कमजोरी मान कर हमारा , हमारे परिवार, धर्म व संस्कृति का मजाक उडाता हैं या हभारी एकता-अखंडता व सम्प्रभुता को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करता हैं तो उसे सबक अवश्य सिखाया जाना चाहिए ताकि वह फिर कभी ऐसा दुस्साहस न करें ।
शिव जी की वेशभूषा यह संदेश देती हैं कि हमें फिजूल की दिखावा प्रवृत्ति से दूर रहना चाहिए और सादा जीवन और उच्च विचारों के साथ जीना चाहिए उनका खानपान यह संदेश देता हैं कि हमें जो भी स्वादिष्ट भोजन खाने को मिलता हैं उसे भगवान का प्रसाद समझ कर खाना चाहिए और भोजन में किसी भी प्रकार की मीनमेख ( कमी) नहीं निकालनी चाहिए ।
नंदनी के माध्यम से उन्होंने भक्तों को संदेश दिया हैं कि वे पशुओं के प्रति दया का भाव रखें और उन्हें हरा चारा नियमित रूप से डालकर पशुओं के जीवन की रक्षा करें व दान – पुण्य का कार्य कर पशुओं की सेवा करें ।
शिवजी के साथ माता पार्वती जी विराजमान रहती हैं जो यह संदेश देता हैं कि हमें महिलाओं का सम्मान करना चाहिए । चूंकि महिलाएं दया , करूणा, ममता, वात्सल्य की देवी होती हैं और जिस घर में महिलाओं का सम्मान होता हैं वहीं देवता निवास करते हैं । नारी ममता की मूर्त होती हैं । वह घर – परिवार को जोडना जानती हैं कि न तोडना ।
इसीलिए कहा गया हैं कि शिव ही सत्य हैं । शिव ही शिवम् है और शिव ही सुंदरम् है । वे तो सबके पालनहार है । वे अपने भक्तों के भाव के भूखें हैं । जो शिव को भजता हैं, उनके नाम का स्मरण करता हैं भोलेनाथ उसका बेडा पार लगा देता हैं।
¤ प्रकाशन परिचय ¤
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From »सुनील कुमार माथुरलेखक एवं कविAddress »33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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