
सुनील कुमार माथुर, जोधपुर, राजस्थान
सुनील ने अपने जीवन काल में अनेक परेशानियां झेली। सरकारी नौकरी के लिए परीक्षा दी, लेकिन सरकार की गलत नीतियों के कारण उसे सरकारी नौकरी में नियुक्ति देने से वंचित कर दिया। तब सुनील ने न्याय पाने के लिए न्यायालय का द्वार खटखटाया व सुप्रीम कोर्ट तक लडाई लडी। आखिर में सुप्रीम कोर्ट में सुनील जीत गया। लेकिन सरकार की लालफीताशाही के चलते उसे कोर्ट के फैसले के करीबन सात साल बाद सरकारी सेवा में नियुक्ति मिली, लेकिन इन सात वर्षों का सरकार ने उसे आर्थिक रूप से हुए नुकसान का मुआवजा नहीं दिया।
करीब 17 साल की सरकारी सेवा के बाद सुनील सेवानिवृत्त हो गया। सेवानिवृत्ति समारोह पर आयोजित सह भोज के दौरान एक महिला ने सुनील की पत्नी से कहा, बहन सुना हैं कि अंकल ने अपने सेवाकाल के दौरान गाडी, बंगला, गहनें कुछ भी नहीं दिलाये। ऐसी भी ईमानदारी किस काम की। लोग तो अपने सेवाकाल के दौरान ही सात पीढ़ियों तक का बैंक बैलेंस बना लेते है और अंकल जी ने कुछ भी नहीं कमाया। ऐसी भी क्या ईमानदारी।
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तब सुनील की पत्नी बोली, बहन ! मैं इनकी ईमानदारी से ही बहुत खुश हूं। मेरे लिए तो यही असली गहनें है। मैं एक डे्स में ही जीवन व्यतीत करना जानती हूं। ये सरकारी नौकरी से जिस ईमानदारी के सर्टिफिकेट के साथ सेवानिवृत्त हुए हैं, वही हमारी सबसे बडी पूंजी व उपलब्धि है। मुझे इनकी ईमानदारी पर पूरी विश्वास है और यह विश्वास हो मेरे लिए गाडी व बंगले हैं। यह सुनकर वह महिला वहां से चुपचाप निकल गई। उसे विश्वास हो गया कि ईमानदार लोगों की आज कोई कमी नहीं है।








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