
यह लेख हेट स्पीच, युद्ध और बढ़ती महंगाई जैसी समस्याओं पर चिंता व्यक्त करता है। इसमें अणुव्रत आंदोलन के सिद्धांतों को अपनाकर नैतिकता, संयम और विश्व शांति की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
- हेट स्पीच और युद्ध के बीच शांति की खोज
- अणुव्रत दर्शन: नैतिकता से विश्व कल्याण
- युद्ध, महंगाई और मानवता का संकट
- संयम और सद्भाव से शांति का मार्ग
सुनील कुमार माथुर
हेट स्पीच सामाजिक समरसता का सबसे बड़ा दुश्मन है, जिससे सभी को बचकर रहना होगा। सोशल मीडिया हेट स्पीच को जंगल में आग की तरह फैला रहा है, जो न्यायसंगत नहीं है। हमें कोई भी ऐसा व्यवहार, लेखन, भाषण नहीं करना चाहिए, जिससे नस्ल, जाति, धर्म के आधार पर घृणा, हिंसा, नफरत को बढ़ावा मिले अथवा किसी की भावना को ठेस पहुँचे, अपितु हमें मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए अणुव्रत के दर्शन के आधार पर चलना चाहिए।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध से आज हर कोई परेशान है। भारत की जनता पर इस युद्ध के बहाने जो आर्थिक बोझ लादा गया है, उसने आम जनता की कमर तोड़ दी है और अब भी जनता-जनार्दन पर महंगाई का बोझ लादकर उसे गन्ने व नींबू की तरह निचोड़ा जा रहा है। सरकार केवल आश्वासन दे रही है कि सप्लाई सुचारू रूप से जारी है, डर की कोई चिंता नहीं है।
लाखों रुपए मासिक वेतन व नाना प्रकार की मुफ्त सुविधाएं भोगने वाले नेता व जनप्रतिनिधियों को क्या मालूम कि महंगाई क्या होती है। आज बढ़ती महंगाई से ग्रामीण व शहरी क्षेत्र की जनता पूरी तरह से परेशान है। खाने-पीने की चीजों व रोजमर्रा की वस्तुओं के बढ़ते दामों ने जीना दुभर कर दिया है। तमाम कंपनियां व उत्पादक अब तक बढ़ी हुई लागत का सारा भार ग्राहकों पर डाल चुके हैं। अगर युद्ध के हालात नहीं सुधरे, तो कीमतें और बढ़ सकती हैं।
युद्ध से किसी का भला होने वाला नहीं है और न ही युद्ध किसी समस्या का समाधान है, अपितु यह तो विनाश का कारण है। सभी को मिलजुलकर रहना चाहिए, तभी विश्व का कल्याण होगा। अणुव्रत आंदोलन हमें प्रेरणा देता है कि संयम ही जीवन है और अणुव्रत दर्शन बिना किसी जाति, सम्प्रदाय, वर्ण, लिंग, रंग अथवा नस्लीय भेद के व्यक्ति-व्यक्ति की नैतिक चेतना को जागृत कर स्व-कल्याण से समाज व विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।
अणुव्रत दर्शन के अनुसार चलकर ही हम हेट स्पीच के कहर से बच सकते हैं, अन्यथा विश्वभर में अशांति का साम्राज्य व्याप्त हो जाएगा, जिससे बचना फिर कठिन कार्य हो जाएगा। अतः हेट स्पीच से बचने के लिए अणुव्रत आंदोलन को जीवन में अंगीकार करना होगा, तभी विश्व शांति संभव है।
सुनील कुमार माथुर
सदस्य अणुव्रत लेखक मंच एवं
स्वतंत्र लेखक व पत्रकार
33 वर्धमान नगर, शोभावतों की ढाणी, खेमे का कुआं, पाल रोड, जोधपुर, राजस्थान







