
यह लेख किताबों, अच्छे मित्रों, मधुर संबंधों और निरंतर प्रयास के महत्व को रेखांकित करता है। इसमें सकारात्मक सोच, नैतिक मूल्यों और संस्कारों के माध्यम से जीवन को सफल और सार्थक बनाने का संदेश दिया गया है।
- किताबें, दोस्त और जीवन के मूल्य
- संबंधों की मिठास और सफलता का मंत्र
- सकारात्मक सोच से सफल जीवन
- संस्कार, प्रयास और सफलता की राह
सुनील कुमार माथुर
किताबें और दोस्त कम हों पर लाजवाब हों तो जिंदगी बदल जाती है। चूंकि पुस्तकें ज्ञान का भंडार होती हैं, जिन्हें कोई छीन नहीं सकता। ज्ञान प्राप्त करने के लिए पुस्तकें पढ़ना आवश्यक है। पुस्तकें मानव के अंधेरे वाले मस्तिष्क में प्रकाश उत्पन्न करती हैं। साहित्यकार साहित्य सृजन करते समय आयु वर्ग का ध्यान रखता है, क्योंकि वे जानते हैं कि हमें ऐसा साहित्य सृजन करना है जो बच्चों का चारित्रिक विकास करे और अंधविश्वास से बचाए।
किताबें ही एक मात्र माध्यम हैं, जो अपनी बात रचनाओं के माध्यम से पाठकों तक पहुंचा सकती हैं। लिखना साहित्यकार का अधिकार है और पढ़ना बालकों व पाठकों का अधिकार है। ठीक उसी प्रकार अच्छे दोस्त भले ही कम हों, लेकिन हमारी जिंदगी को बेहतर बना देते हैं। अतः अच्छे लेखकों की ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक पुस्तकें पढ़िए और सोच-समझ कर मित्र बनाइए।
संबंध
जीवन में संबंधों का बड़ा ही महत्व है। इसलिए सकारात्मक सोच रखें और हर किसी के साथ सकारात्मक सोच रखते हुए संवाद कीजिए। जहां संवाद है, वहां हर शंका, समस्या और विवाद का समाधान है। जहां निरंतर संवाद होता है, वहां शंका का कोई भी स्थान नहीं होता है। आज के समय में मधुर संबंधों का होना नितांत आवश्यक है, वरना जीवन का कोई मकसद नहीं है। राग-द्वेष, लड़ाई-झगड़े में जीवन व्यतीत करना भी कोई जीवन है। आनंदमय जीवन व्यतीत करने के लिए प्रेम, स्नेह और मिलनसारिता का होना आवश्यक है। इसी की नींव पर संबंध मधुर होते हैं, फिर धैर्य, सहनशीलता, क्षमा, त्याग जैसे गुण शामिल होकर संबंधों में प्रगाढ़ता ले आते हैं, जो संबंधों की दीवार को और मजबूत कर देते हैं। इसलिए सकारात्मक सोच रखें और अनुभवों का स्वागत कीजिए, न जानें कौन सा अनुभव जिंदगी बदल दे।
माना कि जिंदगी की राहें आसान नहीं हैं, लेकिन मुस्कुराते हुए चलने में कोई नुकसान नहीं है। अतः हर क्षण हंसते-मुस्कुराते रहिए। आपकी मुस्कुराहट दूसरों के चेहरे की उदासी को मिटा दे, तो समझिए कि आपकी मुस्कुराहट काफी लाभदायक है, जो मुरझाए चेहरे पर मुस्कान बिखेरने में कितनी मददगार है। इससे अधिक हमें आपसे और क्या चाहिए। बस नियत साफ रखें, कर्म खुद रास्ता बना लेंगे। जिंदगी में हमें मिलता तो बहुत कुछ है, लेकिन हम गिनती उसी की करते हैं जो हमें हासिल न हो सका।
सफलता
जीवन में हर कदम पर सफलता तो हर कोई चाहता है, लेकिन उसके लिए पर्याप्त प्रयास नहीं करता है और फिर असफल होने पर किस्मत को दोष देता है। सफलता पाने के लिए निरंतर प्रयास करना आवश्यक है। सफलता उनको ही मिलती है, जो हर सुबह अपने लक्ष्य को याद करके आगे बढ़ता है। सफलता की दौड़ में कभी असफलता भी मिल जाए, तो उस वक्त घबराएं नहीं, क्योंकि यह असफलता हमें सफलता को पाने का एक और मौका देती है, ताकि हम अब तक हुई गलतियों व खामियों को भूलकर फिर से नए सिरे से प्रयास करें। सफलता अवश्य ही हासिल होगी, बस प्रयास नहीं छूटना चाहिए।
सबसे बड़ा गिफ्ट
दुनिया का सबसे बड़ा गिफ्ट किसी को दिल से याद करना और उसे एहसास दिलाना कि आप हमारे लिए स्पेशल हो। आज नैतिक मूल्यों में जो गिरावट आई है, उसके लिए हम शिक्षण संस्थाओं को दोषी ठहराते हैं। चूंकि मोटी-भारी फीस लेने के बावजूद भी वे बच्चों को नैतिक संस्कार नहीं दे पा रहे हैं। उधर शिक्षण संस्थाओं के संचालकों का कहना है कि बच्चों को नैतिक संस्कार देना अभिभावकों का कार्य है। लेकिन हकीकत यह है कि पहले शिक्षण संस्थाओं में नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए पाठ्यक्रम था, जिसे आधुनिकता और शिक्षा में सुधार के नाम पर हटा दिया गया। साथ ही हमारे महापुरुषों व स्वतंत्रता सेनानियों के पाठ भी पाठ्यक्रम से हटा दिए गए। यही वजह है कि आज का बालक शिक्षा तो ग्रहण कर रहा है, लेकिन नैतिक मूल्यों से अनभिज्ञ है। वह केवल अपने अधिकारों की बात करता है, न कि कर्तव्यों की। सबसे बड़ा गिफ्ट यही है कि हम अपने बच्चों को आदर्श संस्कार दें।
जीवन में शांति चाहिए तो हर मुद्दे पर भड़कने से अच्छा है कि पहले सामने वाले की सुन लें और फिर अपनी बात कहें। एक नन्हीं बच्ची भाविनी ने हरिद्वार से लौटकर कहा कि मैं अपने नाना को हरिद्वार छोड़कर आई हूं, जबकि वह अपने परिवारजनों के साथ अपने नाना की अस्थियां गंगा में प्रवाहित कर आई थी। लेकिन उसने जिस तरह से अपनी बात कही, वह आदर्श संस्कारों का ही प्रभाव कहा जा सकता है। जिंदगी में कितनी भी हेराफेरी करके आप चाहे कितने भी रुपए कमा लीजिए, लेकिन एक बात हमेशा याद रखिए कि आपके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी सही और नेक कर्म हैं, जो आपको हर मुश्किल से बचाएंगे, न कि रुपए।
सुनील कुमार माथुर
सदस्य अणुव्रत लेखक मंच एवं
स्वतंत्र लेखक व पत्रकार
जोधपुर, राजस्थान








