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बाल कहानी : सेवा का भाव, जब गांव वालों को पता चला तो उन्होंने आरूषि के कार्य की सराहना करते हुए उसके प्रति आभार व्यक्त किया व उसका नागरिक अभिनंदन किया। इस अवसर पर डाक्टर आरुषि ने कहा कि सेवा की भावना ही डाक्टर का पहला धर्म हैंं। #सुनील कुमार माथुर, जोधपुर, राजस्थान
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आरूषि का बचपन से ही यह सपना था कि वह पढ लिख कर डाक्टर बनेगी और सेवा भाव से रोगियों की सेवा कर उन्हें स्वास्थ्य लाभ दूंगी। उसका सपना साकार हुआ और वह डॉक्टर बन गई और उसने अपने ही गांव में अपना क्लीनिक खोल लिया और रोगियों की सेवा करने लगी।
रविवार का दिन था। गोपाल, रमेश, मुकेश, गर्वित और चेतन खेल के मैदान में खेल रहे थे। तभी उन्हें सडक दुर्घटना की जानकारी मिली। वे खेल को छोडकर तत्काल दुर्घटना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि कोई अज्ञात वाहन कामवाली बाई के लडके रामू को टक्कर मार कर भाग गया। रामू के गहरी चोट लगी थी। बच्चों ने तत्काल रामू को डाक्टर आरूषि की क्लिनिक में ले गये और डॉक्टर आरुषि को सारी बात बताई।
डाक्टर आरूषि ने तुरंत रामू का उपचार शुरू कर दिया। बच्चों ने आरुषि को बताया कि यह कामवाली बाई का लडका हैं और इसकी मां पिछले दो – तीन महिनों से बीमार हैं और उसकी नौकरी भी छूट गई है। मां के अलावा परिवार में रामू का और कोई नहीं हैं। डाक्टर आरूषि की देखरेख में रामू का उपचार हुआ। कुछ ही दिनों के उपचार से रामू पूरी तरह से ठीक हो गया।
डाक्टर आरूषि स्वंय रामू को उसके घर पहुंचाने गयी। रामू की मां ने हाथ जोडकर आरुषि के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बेटा, मैं स्वंय बीमार हूं। मैं आपको फीस तो नहीं दे सकती लेकिन आशीर्वाद देती हूं कि तुम अपने मिशन में कामयाब हो। इस पर डाक्टर आरूषि ने कहा कि मैंने तो अपना मानवीय धर्म निभाया। ईश्वर की कृपा से आपका बेटा ठीक हो गया।
जब गांव वालों को पता चला तो उन्होंने आरूषि के कार्य की सराहना करते हुए उसके प्रति आभार व्यक्त किया व उसका नागरिक अभिनंदन किया। इस अवसर पर डाक्टर आरुषि ने कहा कि सेवा की भावना ही डाक्टर का पहला धर्म हैंं। मैंने तो अपना धर्म निभाया है।
डाक्टर का धर्म रोगी की सेवा करना हैं न कि उपचार के नाम पर अनावश्यक रूप से धन कमाना। चूंकि आम जनता की नज़रों में डाक्टर इस धरती के भगवान माने जाते हैं फिर भला भगवान अपने भक्तों ( रोगियों ) को कैसी दुःखी देख सकता हैं।
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Nice
अति उत्तम । सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है ।
Nice
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