
यह कविता भारत की जनगणना के महत्व, जनसहभागिता और जनकल्याणकारी योजनाओं में उसकी भूमिका को रेखांकित करती है। रचनाकार ने नागरिकों से सही जानकारी देने तथा प्रगणकों का सहयोग करने का आह्वान किया है। कविता जनगणना को राष्ट्र निर्माण, विकास और भविष्य की योजनाओं का आधार बताती है।
- जनगणना से जनकल्याण का संदेश देती प्रेरक कविता
- सही जानकारी, सशक्त भारत : जनगणना पर काव्यात्मक आह्वान
- डिजिटल जनगणना और विकास की नई राह
- जनगणना के महत्व को रेखांकित करती जनजागरण कविता
मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
भारत की जनगणना, जनगणना से जनकल्याण,
नई सुबह है, नया संदेश—जनगणना की ऋतु है आई।
सही-सही देना जानकारी, तभी बजेगी मधुर शहनाई।।
जब जागेगा जन, गण, मन! तब ही होगा परिवर्तन।
भारत की जनगणना, जनगणना से जनकल्याण।।
घर-घर में होगी दस्तक, जन-जन की होगी गिनती,
कितने अनपढ़ और कितने पढ़े, घर कच्चा है या पक्का,
जनगणना से सौम्य-शांत, सुखदायी होगा नवजीवन।
भारत की जनगणना, जनगणना से जनकल्याण।।
डिजिटल युग में डिजिटल होगी प्रथम बार जनगणना,
बिजली, पानी, शौचालय, रोजगार जैसे होंगे सवाल,
सही-सही देना जवाब, इसमें ही है हर जन की शान।
भारत की जनगणना, जनगणना से जनकल्याण।।
जाति-धर्म का भेद भूलकर प्रगणक का सहयोग करें,
सरकार को सटीक आँकड़े मिलेंगे, तब हम आगे बढ़ेंगे,
नवीन योजनाओं का होगा निर्माण, बनेगी राष्ट्र पहचान।
भारत की जनगणना, जनगणना से जनकल्याण।।
हर संकट मिट जाएगा, साफ होगा भविष्य का आईना,
खेत से लेकर सरहद तक बहेगी नवसृजन की बयार,
जनगणना है सुंदर-सुखमय भारत माँ का आभूषण।
भारत की जनगणना, जनगणना से जनकल्याण।।
जन डरें नहीं! गोपनीय रहेगा प्रत्येक नागरिक डेटा,
स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, सड़कों का होगा विस्तार,
अपने भारतवर्ष के कोने-कोने तक पहुँचेगा पोषण।
भारत की जनगणना, जनगणना से जनकल्याण।।
मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
ग्राम रिहावली, डाकघर तारौली गूजर, फतेहाबाद, आगरा, उत्तर प्रदेश – 283111
मोबाइल : 9627912535









