वॉटर एक्टिविटी के लिए बेहद शानदार है UP की ये जगह

वॉटर एक्टिविटी के लिए बेहद शानदार है UP की ये जगह, पर्यटन स्थल होने के बावजूद भी यहां साफ-सफाई की काफी कमी देखने को मिलती है। खंड़जा फाल वन विभाग के अंदर आता है। वहीं प्रशासन की तरफ से यहां पर सिर्फ जुलाई-अगस्त के महीने में ध्यान दिया जाता है। लेकिन बाद में सब नॉर्मल हो जाता है।
वैसे तो आपने भारत में कई झरने देखे होंगे। लेकिन क्या आपके उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में किसी खूबसूरत झरने के बारे में सुना है। बता दें कि इस झरने को खड़ंजा फाल के नाम से जाना जाता है। इस जगह पर आने के बाद आप खुद को प्रकृति के बेहद करीब पाएंगे। खड़ंजा फाल विध्य पहाड़ी और घने जंगलों के बीच बहता है। वॉटर एक्टिविटी के लिए यह काफी अच्छी जगह है।
लेकिन सुरक्षा न होने की वजह से इस जगह पर पर्यटक काफी कम आते हैं। बता दें कि बारिश के मौसम में यहां की खूबसूरती देखते ही बनती थी। एक समय पर इस जगह को दूसरा ऋषिकेष कहा जाता था। लेकिन पर्यटन स्थल के रूप में विकसित न हो पाने के कारण यहां पर अधिक पर्यटक नहीं आते हैं। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में मौजूद खड़ंजा फाल पर्यटकों की कमी को झेल रहा है।
पर्यटन स्थल के रूप में विकसित नहीं होने की वजह से यहां पर पर्यटकों की संख्या न के बराबर होती है। वहीं इस जगह पर सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। मिर्जापुर से महज 8 किमी की दूरी पर स्थित बरकछा कलां में खड़ंजा झरना है। यहां पर बहते पानी की आवाज और पहाड़ों के बीच से आता पानी बरबस ही लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचता है। इस जगह पर सिर्फ पूर्वांचल ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों के पर्यटक भी आते हैं।
मानसून के समय यहां पर हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं। क्योंकि बारिश में झरने का नजारा और भी अधिक खूबसूरत हो जाता है। वहीं बारिश के कारण झरने में भी पर्याप्त पानी देखने को मिलता है और आसपास मौजूद पेड़-पौधे व हरियाली इस जगह को और भी अधिक खूबसूरत बनाने का काम करते हैं। खडंजा झरने के आसपास सुरक्षा का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। बता दें कि कुछ समय पहले यहां पर कई बड़े हादसे हुए, जिसमें कई पर्यटकों की जान तक चली गई। लेकिन इसके बाद भी प्रशासन की तरफ से सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं किया गया।
पर्यटन स्थल होने के बावजूद भी यहां साफ-सफाई की काफी कमी देखने को मिलती है। खंड़जा फाल वन विभाग के अंदर आता है। वहीं प्रशासन की तरफ से यहां पर सिर्फ जुलाई-अगस्त के महीने में ध्यान दिया जाता है। लेकिन बाद में सब नॉर्मल हो जाता है।