युवा पीढ़ी आदर्श संस्कारों को अंगीकार कर आगे बढें

सुनील कुमार माथुर
जीवन में संस्कारों का बडा ही महत्व है । आदर्श संस्कार हमारी सबसे बडी पूंजी है । अतः माता पिता का य। दायित्व है कि वे अपने बच्चों को आरम्भ से ही संस्कारवान बनाइये । उन्हें पढने के लिए महापुरुषों की जीवनियां दे , उन्हें किसके साथ कैसे बात करनी है , अपने से बडो के साथ कैसे बात करनी है इसका भान करावे । चूंकि बच्चों की पहली गुरु उसकी मां ही होती हैं ।
अगर हम बच्चों की बचपन से ही हर जिद पूरी करने लग गये तो वह लाड प्यार में बिगड जायेगा । इसलिए जरूरत है कि हम बच्चों को आरम्भ से ही संस्कारवान बनाइये । अगर बचपन में कोई बच्चा बिना वजह की जिद करता है और हम उसकी वह जिद पूरी नहीं करते हैं तो हो सकता है कि बच्चे दो चार घंटे रो लेगा और फिर चुप हो जायेगा । लेकिन हम बच्चों को बचपन में संस्कारवान नहीं बनायेंगे तो फिर वह बच्चा जिन्दगी भर रोयेगा ।
अतः युवा पीढी अपने संस्कारों को न भूले तथा आदर्श संस्कारों के अनुरूप चलकर समाज व राष्ट्र के उत्थान की दिशा में कार्य करें जिससे घर परिवार, समाज व राष्ट्र में एकता कायम रह सके और समाज विकास की और अग्रसर हो सके ।
हर युवा पीढी को संस्कारवान बनना चाहिए और समाज के संस्कारों का लाभ उठाना चाहिए क्योंकि बिना संस्कारों के मानव जीवन व्यर्थ हैं । इसलिए अच्छे संस्कार अर्जित कर देश सेवा में अग्रणीय रहकर देश की सेवा में तत्पर रहे । आदर्श संस्कारों के अनुरूप चलकर ही हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं ।
आदर्श संस्कार ही हमारी सबसे बडी पूंजी है । अतः जीवन में संस्कारों को कभी नहीं भूलना चाहिए । धन दौलत , बंगला , गाडी , सगे संबंधी , यहां तक कि हमारे माता पिता , भाई बहिन , पत्नी , बच्चे कोई हमारे साथ जाने वाला नहीं है । साथ जायेगा तो वह है हमारे आदर्श संस्कारों के कारण कमाया गया पुणय ही ।
¤ प्रकाशन परिचय ¤
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From »सुनील कुमार माथुरलेखक एवं कविAddress »33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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