
ओम प्रकाश उनियाल
केदारनाथ में हुए हैलीकॉप्टर हादसे से यह बात तो साबित हो गयी है कि उत्तराखंड में हैली सेवाएं देने वाली निजी कंपनियां यात्रियों को सुविधा तो देती हैं लेकिन सुरक्षा नहीं दे सकती। कम समय में यात्रा-स्थल तक पहुंचाने जैसी सुविधाएं तो हैं ही मगर कब कहां क्या घटित हो जाए इसकी कोई गारंटी नहीं है।
मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में मानकों की अनदेखी कर रही हैं हैली कंपनियां। केदारनाथ से सवारियां लेकर गुप्तकाशी लौट रहे हैलीकॉप्टर का खराब मौसम के कारण कुछ ही दूरी तक जाने पर दुर्घटनाग्रस्त हो जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। सबसे पहला सवाल तो यह है कि खराब मौसम में उड़ान भरना बहुत बड़ा जोखिम होता है।
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विशेषतौर पर केदारनाथ जैसे अति ऊंचाई वाले क्षेत्र में। जहां पल-पल में मौसम रंग बदलता रहता है। यहां सकरी पहाड़ियों के बीच से गुजरना होता है। कोहरा, बारिश व बर्फबारी में हैली का उड़ान भरना खतरा मोल लेना है।सही तरीके से मेंटिनेन्स (रख-रखाव) न होना। एक दिन में एक हैलीकॉप्टर द्वारा कई बार लौट-फेर किया जाता है।
खर्चा बचाने के चक्कर में रख-रखाव में लापरवाही बरती जाती है। जब से राज्य में निजी हैली सेवाएं शुरु की गयी हैं तब से पहले भी दुर्घटनाएं घटी हैं। पायलटों का पूरी तरह प्रशिक्षित न होने का भी सवाल खड़ा होता है। मौसम की सटीक जानकरी के लिए इस प्रकार के उपकरण की व्यवस्था होनी चाहिए जो उड़ान भरने से पहले संकेत दे।
एक खास सवाल यह भी उठता है कि ऐसे हादसों का कौन जिम्मेदार है? राज्य सरकार या एविएशन विभाग जो खामियों को नजरअंदाज करते हैं। या फिर हैली कंपनियां जिनके बीच होड़ लगी रहती है कई चक्कर काटने की। यात्रियों की सुरक्षा से किसी को कोई मतलब ही नहीं है।
¤ प्रकाशन परिचय ¤
![]() | From »ओम प्रकाश उनियाललेखक एवं स्वतंत्र पत्रकारAddress »कारगी ग्रांट, देहरादून (उत्तराखण्ड) | Mob : +91-9760204664Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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