
Noida में मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा की जांच में व्हाट्सएप और क्यूआर कोड के जरिए भीड़ जुटाने का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार श्रम संबंधी मुद्दों से शुरू हुआ विरोध जल्द ही 80 से अधिक स्थानों पर पथराव और आगजनी में बदल गया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। प्रशासन ने मामले में कई एफआईआर दर्ज कर डिजिटल नेटवर्क के जरिए हिंसा भड़काने के आरोपों की जांच तेज कर दी है।
- मजदूर प्रदर्शन हिंसक, नोएडा के कई सेक्टरों में पथराव
- पुलिस जांच में बड़ा खुलासा, WhatsApp ग्रुप से फैली हिंसा
- नोएडा बवाल के पीछे डिजिटल साजिश? QR कोड से बनाए गए ग्रुप
- मजदूर आंदोलन से शुरू हुआ प्रदर्शन, 80 स्थानों तक फैली हिंसा
नोएडा: Noida के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। प्रारंभिक जांच के मुताबिक, इस बवाल के पीछे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप और क्यूआर कोड के जरिए भीड़ जुटाने की साजिश का शक जताया जा रहा है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि कई व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से लोगों को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए संगठित किया गया, जिसके बाद शहर के करीब 80 से अधिक स्थानों पर अचानक हिंसक घटनाएं सामने आईं।
जानकारी के अनुसार, मजदूरों का प्रदर्शन मूल रूप से वेतन वृद्धि की मांग को लेकर शुरू हुआ था। जब पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने के फैसले के बारे में प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, तब स्थिति अचानक बिगड़ गई। प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पुलिस वाहनों पर पथराव शुरू कर दिया और कई स्थानों पर पुलिस बस और अन्य वाहनों को नुकसान पहुंचाया। घटनाएं मुख्य रूप से सेक्टर-121 और फेज-2 क्षेत्र से शुरू हुईं, लेकिन धीरे-धीरे यह तनाव शहर के अन्य हिस्सों में भी फैल गया।
सेक्टर-70, 71 और 80 सहित कई इलाकों में मजदूरों और पुलिस के बीच झड़प की घटनाएं सामने आईं। इन झड़पों में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिनमें महिला पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने मौके पर अतिरिक्त बल तैनात किया और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। कई स्थानों पर आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे सार्वजनिक और निजी संपत्ति को भारी नुकसान हुआ। इसके कारण कुछ समय के लिए यातायात व्यवस्था भी बाधित हो गई।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि विरोध प्रदर्शन को संगठित करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग किया गया। जांचकर्ताओं के अनुसार, क्यूआर कोड के माध्यम से लोगों को रातोंरात विभिन्न व्हाट्सएप समूहों में जोड़ा गया, जिनमें श्रमिक संगठनों और यूनियन से जुड़े नामों का इस्तेमाल किया गया था। इन समूहों में कथित रूप से भड़काऊ संदेश और निर्देश साझा किए गए, जिससे भीड़ को एक साथ विभिन्न स्थानों पर इकट्ठा होने के लिए प्रेरित किया गया।
पुलिस ने अब तक अफवाह फैलाने और अशांति भड़काने के आरोप में कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। साथ ही सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप में कुछ एक्स (ट्विटर) हैंडल के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की गई है। इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने घटना की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल माध्यमों के जरिए हिंसा भड़काने की साजिश की पूरी तरह जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल शहर में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन पुलिस और प्रशासन हाई अलर्ट पर हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।







