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लंका दहन होते थे “नारी सम्मान” के लिए… कैंडल मार्च नहीं

नारी का यौन शोषण, नारी को सुरक्षा देने में हमेशा असमर्थ है "कानून"

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काजल राज शेखर भट्ट
देहरादून उत्तराखण्ड

भारतीय समाज के इतिहास को देखो तो पता चलता है कि भारत का समाज हमेशा पुरुष प्रधान ही था और शायद रहेगा भी। जबकि इस पुरुष प्रधान समाज में भी महिलाओं ने बुलंदियों के कई झंडे गाड़े हैं, लेकिन महिलाओं के लिए तब भी कई रास्ते मुश्किलों से भरे हुए रहे। महिलाओं पहले भी कई समस्याओं से लडना पड़ा और अब भी कई मुश्किलों से जूझना पड़ता है। इन समस्याओं में छेड़छाड़ और बलात्कार भी एक अहम समस्या है। आज के समय में भारत के बड़े शहरों से लेकर छोटे शहरों और गांवों तक में छेड़छाड़ और बलात्कार की समस्या ने एक बड़ा रूप धारण कर रखा है।

अनोखा समाज : छेड़छाड़ और बलात्कार है अहम समस्या

लड़कियों के साथ छेड़छाड़ और बलात्कार न केवल सूनसान जगहों पर होती है, बल्कि लड़कियां भीड़ वाली जगहें जैसे, सिनेमा हॉल, पार्क, शॉपिंग मॉल में भी सेफ महसूस नहीं करती हैं। लड़कियों पर भद्दे कमेंट कसना, जबरन छूना या जबरन बात करने की कोशिश करने जैसी हरकतें की जाती हैं। ये छेड़छाड़ करने वाले पुरुष केवल अनपढ़ या कम पढ़े लिखे लोग ही नहीं, बल्कि इनमें शिक्षित लोग भी शामिल होते हैं।

शर्म औरत का गहना है…

पुरुष कहते हैं कि शर्म औरत का गहना है, बिल्कुल ठीक है। कैसी शर्म, जब देश में नारी का यौन शोषण निरंतर हो रहा है और कानून सुरक्षा देने में असमर्थ है। “बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ”, लेकिन क्यों यौन शोषण की पूर्ति करने के लिए। जिस नारी के सम्मान की बात स्वयं ईश्वर ने कही है। लगता है, वह पहले भी अबला थी और आज शिक्षित होने के बाद भी अबला ही है। बलात्कार जैसी घटनाओं के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण कमजोर पुलिस प्रशासन व लचर न्याय व्यवस्था है। लोगों में छोटी और कमजोर मानसिकता, अशिक्षा सामाजिक जागरूकता की कमी होना भी इसका बड़ा कारण है।

पुरुष प्रधान समाज में भी महिलाओं ने बुलंदियों के कई झंडे गाड़े हैं…

अब लोग लड़की के चरित्र का आकलन उसके पहनावे व खान पान से करने लगे है, जो कि सरासर गलत है। आज का एक प्रसिद्ध डायलॉग है “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ”। या यूं कहें कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और फिर उसे किचन में बैठा दो। इस तरह की मानसिकता वाले लोगों को मैं थप्पड़ लगाने की ओपिनियन देती हूं। उत्तर प्रदेश हो, बिहार हो, राजस्थान हो या सम्पूर्ण देश, हर जगह एक के बाद एक रेप के भयानक किस्से सामने आते है।

जिनको सुनकर ही दिल दहल उठता है। नारी उत्पीड़न में दिल्ली निर्भया केस और हाथरस काण्ड ने पूरे देश का झकझोंर कर रख दिया। किन्तु क़ानून हमेशा सोया रहता है, उनके लिए स्त्री की इज्जत का कोई महत्व नहीं है। पता नहीं कौन मोमबत्तियां पकड़ना सिखा गए हमें, वरना नारी के सम्मान में लंका दहन और महाभारत करने की संस्कृति थी हमारी।

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