
ओम प्रकाश उनियाल
सुरक्षा चाहे अपनी हो, परिवार की हो या फिर राष्ट्र की, के प्रति हमेशा जागरूक रहना आवश्यक होता है। इसी उद्देश्य को लेकर हरेक को चलना चाहिए। सबको अपना नैतिक कर्तव्य समझना चाहिए। ‘सुरक्षित रहो, सुरक्षित रखो’ का भाव मन में जगाना अति आवश्यक है। कभी थोड़ी-सी लापरवाही का परिणाम कितना गंभीर हो सकता है, यह सब भली-भांति समझते है़ं।
‘राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद’ संगठन द्वारा 4 मार्च 1972 को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस’ मनाने की शुरुआत की गई। यह दिन खासतौर पर देश की सरहदों पर डटे जाबांज सेना के जवानों को समर्पित है। जिनकी बदौलत देश का प्रत्येक नागरिक अमन-चैन की सांस ले रहा है। वैसे तो मनुष्य ही नहीं हर प्राणी में आत्मरक्षा व अपने से जुड़े अन्य की सुरक्षा करने की भावना होती है।
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फिर मनुष्य को तो और भी सजग होना चाहिए? राष्ट्र की सुरक्षा तो सर्वोपरि है ही। लेकिन सामाजिक सुरक्षा भी आवश्यक है। कार्यक्षेत्र कोई-सा क्यों न हो सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी है। स्वास्थ्य, पर्यावरण, प्रदूषण, गरीबी, अशिक्षा, महिला सुरक्षा के प्रति विभिन्न माध्यमों से जागरूकता लायी जा सकती है।
सुरक्षा के प्रति चेतना जगाने के लिए विभिन्न सामाजिक संगठन व बुद्धिजीवी लोग अपना योगदान दे सकते हैं। सुरक्षा संबंधी नियमों के बारे में जानकारी होने से ही हम खुद भी सुरक्षित रह सकते हैं, समाज व राष्ट्र को भी सुरक्षित रख सकते हैं।
¤ प्रकाशन परिचय ¤
![]() | From »ओम प्रकाश उनियाललेखक एवं स्वतंत्र पत्रकारAddress »कारगी ग्रांट, देहरादून (उत्तराखण्ड)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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