सिद्धार्थ गोरखपुरी एक चेहरा अब तेरे जैसा लगता है सीरत से तो मेरे जैसा लगता है इश्क...
सिद्धार्थ गोरखपुरी
सिद्धार्थ गोरखपुरी कुछ तो पीर पराई लेकर चलना सीख गया हूँ मैं जमाने की अनेक रुसवाई लेकर...
सिद्धार्थ गोरखपुरी गर मुश्किलों में रखकर तूँ कोई हल निकाले जो टूट मैं गया तो रखना थोड़ा...
सिद्धार्थ गोरखपुरी ये मन अक्सर बुनता रहता है ,ख्वाबों का ताना बाना । दिल भी अक्सर छेड़े...
सिद्धार्थ गोरखपुरी श्याम के भक्तों ने कह डाला है अबतो श्याम से राधा की है पैरवी बस...
सिद्धार्थ गोरखपुरी एक उम्र खरच कर कुछ न मिला तुमको क्या पता सचमुच न मिला क्या हुआ...
सिद्धार्थ गोरखपुरी जो बिना थके सारा शहर चलाता है वो बड़ी मुश्किल से खुद का घर चलाता...
सिद्धार्थ गोरखपुरी पौवालय से पौवा लेकर डगमग पाँव से गाँव चले हीत -मित्र के प्रबल प्रेम में...
सिद्धार्थ गोरखपुरी दोनों नयन सावन बनकर रिमझिम-रिमझिम बरसात करें समझ तनिक आता ही नहीं के कितने हैं...
सिद्धार्थ गोरखपुरी मोहन! मुरली से प्रीत तुम्हारी अगाध अनन्त हुई कैसे प्रीत में पागल मीराबाई मन से...












