August 29, 2026

साहित्य लहर

सिद्धार्थ गोरखपुरी वक्त कभी हालात नहीं समझता इश्क! मजहब, उमर, जात नहीं समझता खुदा की नजर में...
राजेश ध्यानी ‘सागर’ स्यां घसेरी बोलि नी ग्यें शांनि कै ग्ये आंख्यू ना भोंल़ ओंल़ घास ली...
राजेश ध्यानी ‘सागर’ जिदंगी इतनी पिलादे यार मैं सो ना सकूं जिसको सींने से लगाया वो खांमोश...
विकास कुमार दाउदनगर, औरंगाबाद | मो : 8864053595 दुश्मन की गोलियों का सामना करेंगे! आजाद ही है...
सिद्धार्थ गोरखपुरी जब भी इस दुनिया से मैं खुद को साझा करता हूँ मानो लगता है मुझको...
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