October 30, 2026

साहित्य लहर

सुनील कुमार खुशियों के खातिर हमारे खुशियां अपनी देता त्याग मेरा भाई मेरा अभिमान। मुझ पर करता...
सिद्धार्थ गोरखपुरी जो बिना थके सारा शहर चलाता है वो बड़ी मुश्किल से खुद का घर चलाता...
कविता नन्दिनी माँ की आँखों के तारे हो सूरज चाँद सितारे तुम हो मेरी खुशियाँ हैं तुम...
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