August 29, 2026

साहित्य लहर

सिद्धार्थ गोरखपुरी मोहन! मुरली से प्रीत तुम्हारी अगाध अनन्त हुई कैसे प्रीत में पागल मीराबाई मन से...
राजेश ध्यानी “सागर” किसका श्रृंगार करू सुबह का या रात का किसका इन्तजार करू वफ़ा या बेफ़वाई...
कविता नन्दिनी रक्षित हिमगिरि से, सागर से प्यारा हिन्दुस्तान है जिसके वीर सपूतों का गौरवशाली बलिदान है।।...
सिद्धार्थ गोरखपुरी शिव का रंग चढ़ने लगा है शिवाला भी सजने लगा है भोले बाबा का गाना...
Verified by MonsterInsights