
ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर भद्रकाली के समीप एक अनियंत्रित बस की चपेट में आने से दो चचेरे भाइयों शुभम और ऋषभ की मौत हो गई। दोनों ने सुबह अपनी बहनों से राखी बंधवाई थी और उनकी रक्षा का वचन दिया था, लेकिन शाम को हुए दर्दनाक हादसे ने दो परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दिया।
- सुबह बहन से राखी बंधवाई, शाम को हादसे ने छीन लिए दो भाई
- भद्रकाली में दर्दनाक हादसा: अनियंत्रित बस के नीचे दबकर दो चचेरे भाइयों की मौत
- राखी पर बहनों ने मांगी लंबी उम्र, कुछ घंटों बाद भाइयों की मौत की खबर ने तोड़ा परिवार
- ऋषिकेश में रक्षाबंधन की खुशियां मातम में बदलीं, बस हादसे में दो युवकों की जान गई
ऋषिकेश। रक्षाबंधन का पर्व दो परिवारों के लिए ऐसी दर्दनाक याद बन गया, जिसे वे शायद कभी भूल नहीं पाएंगे। सुबह तक घर में राखी की खुशियां थीं। बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर प्यार और विश्वास का धागा बांधा, उनके लंबे और सुखी जीवन की कामना की। भाइयों ने भी बहनों की रक्षा करने और हर सुख-दुख में साथ खड़े रहने का वचन दिया। लेकिन शाम होते-होते नियति ने ऐसा क्रूर खेल खेला कि दो चचेरे भाई एक दर्दनाक सड़क हादसे में हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कह गए। ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर भद्रकाली मोड़ के समीप शुक्रवार देर शाम हुए इस हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया।
तीर्थयात्रियों को लेकर खारास्रोत पार्किंग से हरिद्वार की ओर जा रही एक बस अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे के दौरान सड़क किनारे अपनी स्कूटी खड़ी कर बैठे दो चचेरे भाई बस की चपेट में आ गए। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान शुभम बिष्ट (26) पुत्र कुंदन सिंह बिष्ट और ऋषभ बिष्ट (34) पुत्र विक्रम सिंह बिष्ट के रूप में हुई है। दोनों ऋषिकेश के गंगानगर स्थित गणेश विहार, गली नंबर-6 के निवासी बताए गए हैं। दोनों चचेरे भाइयों की अचानक मौत की खबर जैसे ही घर पहुंची, वहां खुशियों का माहौल चीख-पुकार और मातम में बदल गया।
बताया गया कि शुक्रवार देर शाम करीब साढ़े आठ बजे ऋषिकेश से हरिद्वार की ओर जा रही बस भद्रकाली मोड़ के पास ढलान पर अनियंत्रित हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बस के ब्रेक फेल होने के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और बस पलट गई। इसी दौरान सड़क किनारे मौजूद शुभम और ऋषभ उसकी चपेट में आ गए। हादसा इतना भयावह था कि दोनों चचेरे भाइयों को संभलने या बचने का कोई मौका नहीं मिला। आसपास मौजूद लोगों और राहत-बचाव में जुटी टीम ने उन्हें बस की चपेट से बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और पुलिस तथा अन्य बचाव दल भी मौके पर पहुंच गए।
इस हादसे का सबसे भावुक पहलू यह रहा कि दोनों भाई उसी दिन सुबह अपनी बहनों से राखी बंधवा चुके थे। घर में रक्षाबंधन का पर्व पूरे उत्साह और पारिवारिक प्रेम के साथ मनाया गया था। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके लंबे जीवन और सुख-समृद्धि की कामना की थी। भाइयों ने भी परंपरा के अनुसार बहनों को उनकी रक्षा करने और हर परिस्थिति में साथ निभाने का भरोसा दिया था। किसी को यह अंदाजा नहीं था कि सुबह लिया गया जीवनभर साथ निभाने का वही वचन शाम तक एक ऐसी दर्दनाक स्मृति बन जाएगा, जो परिवारों को जीवनभर रुलाती रहेगी। जिन बहनों ने कुछ घंटे पहले भाइयों की कलाई पर राखी बांधी थी, रात होते-होते उन्हें उनके निधन की खबर मिली। रक्षाबंधन की मिठास कुछ ही घंटों में गहरे शोक में बदल गई।
बताया जा रहा है कि हादसे के बाद दोनों परिवारों में कोहराम मच गया। जिन घरों में सुबह राखी, मिठाइयों और हंसी-खुशी का माहौल था, वहां शाम को मातम छा गया। परिजनों और परिचितों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा था कि सुबह तक परिवार के बीच मौजूद दोनों भाई अब कभी वापस नहीं लौटेंगे। भद्रकाली के समीप हुए इस बस हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी और ढलान वाले मार्गों पर वाहन संचालन की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। दुर्घटना में बस के पलटने और सड़क किनारे बैठे दो युवकों के चपेट में आने की घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। हादसे में अन्य लोगों के घायल होने की भी सूचना के बाद घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।
रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प का पर्व है। लेकिन इस बार शुभम और ऋषभ के परिवारों के लिए यही दिन जीवनभर का दर्द बन गया। बहनों ने सुबह जिन भाइयों की लंबी उम्र की प्रार्थना की थी, उन्हीं भाइयों के निधन की खबर उन्हें उसी रात सुननी पड़ी। राखी का धागा भले ही भाइयों की कलाई पर बंधा था, लेकिन कुछ ही घंटों बाद वह धागा परिवारों के लिए यादों और बिछड़ने के दर्द का प्रतीक बन गया। शुभम और ऋषभ ने सुबह बहनों की रक्षा का वचन दिया था, लेकिन शाम को हुए दर्दनाक हादसे ने दो परिवारों के चिराग बुझा दिए और रक्षाबंधन की खुशियों को हमेशा के लिए मातम में बदल दिया।






