कविता : ब्राम्हण, जिनके चरण ईश्वर पखारते है। अपने गले लगाया है। क्या भूल गए उन सुदामा...
साहित्य लहर
कविता : एक बाप खुल कर रो भी नहीं सकता, अरे माँ तो रो कर दिल हल्की...
लघुकथा : जीवंत गजल, रविवार की शाम को दोनों जन खचाखच भरे हाल में जा कर बैठ गए।...
समकालीन यथार्थ की गहन पड़ताल करतीं कविताएं… ‘नचिकेता’ शीर्षक कविता में कवि ने मिथक के माध्यम से...
हास्य व्यंग्य : सांपनाथ और नागनाथ… बाबा रामदेव जी स्विस बैंक का हिसाब मांगते-मांगते कब अरबपति- खरबपति...
मैंने प्यार किया, आपकी तस्वीर बना कर, आपके रूह को देखा। और अपने अंदर समाहित कर लिया।...
कविता : इक मर्द दिखाई देता है, करुणा कलित हृदय में पीड़ा डेरा डाले सोती है, अनेक...
कविता : अंतरात्म में विवेकानंद, ज्ञान ज्योति प्रज्वलित करो और क्रोधाग्नि को शांत करो अस्तित्व स्वयं का...
कविता : बचपन के दिन, साथ में मेरा पूरा परिवार और उनके प्यार, उस समय बिताये गलियो मे...
कविता : भेद सभी मिटाते हैं, तोड़ ऊंच-नीच के सारे बंधन भेद सभी मिटाते हैं स्वामी जी के...













