
यह कविता रामनवमी के पावन पर्व और भगवान श्रीराम के अवतार की महिमा का वर्णन करती है। इसमें धर्म की स्थापना, बुराई के अंत और आदर्श जीवन मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया गया है। राम के चरित्र को मर्यादा, धैर्य और सत्य के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
- रामनवमी: धर्म और मर्यादा का उत्सव
- अवतार की कथा और आदर्शों का संदेश
- राम नाम की महिमा अपार
- बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व
सैनिक की कलम
गणपत लाल उदय, अजमेर, राजस्थान
धूम-धाम से मनाया जाता रामनवमी त्योहार,
इस दिन ही लिया भगवान विष्णु ने अवतार।
बढ़ गया था धरती पर राक्षसों का अत्याचार,
लिखी है हमने यही रचना रामायण अनुसार।।
देवगण एवं जन-मानस धरती पर थे परेशान,
अयोध्या नगरी जन्मे कौशल्या घर प्रभु राम।
शास्त्रों के अनुसार श्रीहरि के सातवें अवतार,
त्रेतायुग में जन्मे भगवान विष्णु रूप में राम।।
अत्याचारियों का खात्मा किया, दुष्टों का नाश,
राज-पाट सभी छोड़कर वनों में किया वास।
भगवान राम से जुड़ा हुआ है रामनवमी पर्व,
समस्त भारतवासियों को है श्रीराम पर गर्व।।
कई दानव एवं दैत्यों का किया आपने संहार,
अच्छाई की ध्वजा लहराई, बुराई गई हार।
अनेक हैं नाम आपके और रामेश्वर यह धाम,
शिव धनुष तोड़कर आप पहने सीता से हार।।
दया, धैर्य, क्षमा, नम्रता भरा था जिनमें भरमार,
मर्यादा पुरुषोत्तम आपकी महिमा अपरंपार।
जिसने लिया नाम आपका एवं लगाया ध्यान,
तिर गया वह हर प्राणी इस भवसागर से पार।।








