
यह कविता ईद के पावन पर्व पर एकता, प्रेम और भाईचारे का संदेश देती है। इसमें विभिन्न त्योहारों के माध्यम से सामाजिक सौहार्द और आपसी रिश्तों की महत्ता को सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
- ईद का त्योहार: प्रेम और भाईचारे का संदेश
- त्योहारों में एकता की झलक
- ईद और इंसानियत का रिश्ता
- मोहब्बत से महके हर दिल
गणपत लाल उदय
अजमेर, राजस्थान
ईद की नमाज़ पढ़ते हैं सभी देश के मुसलमान,
करते हैं रोज़े-उपवास और मस्जिदों में अज़ान।
इसमें अहम भूमिका वाली ये जुम्मे की नमाज़,
पढ़ें भाई-भाभी, चाचा-चाची, अब्बू-अम्मी जान।।
होली अथवा हो दिवाली, क्रिस्मस चाहे यह ईद,
करते हैं सभी सूरज का, कभी चन्द्रमा का दीद।
एकता और मोहब्बत के यह पर्व हैं सब प्रतीक,
तमन्नाएँ सब पूरी कर, सामान की करते खरीद।।
आओ यारों मिलकर सभी ऐसा कुछ कर जाएँ,
गिले-शिकवे जो कोई हैं, मन में उन्हें भूल जाएँ।
इस ईद के उपलक्ष्य में हम सब खुशियाँ मनाएँ,
अपना मज़हब-धर्म भूलकर स्नेह दीप जलाएँ।।
होती हैं क़व्वालियाँ तो कहीं मुशायरे और गीत,
है स्वयं से छोटों को ईदी गिफ्ट देने की ये रीत।
एक-दूजे से गले मिलें एवं खुशी अता फरमाएँ,
खाएँ-खिलाएँ खीर-पूरी बनाकर अपने मनमीत।।
नफ़रतों को भूलकर हम स्नेह रूपी वृक्ष लगाएँ,
घर-आँगन और बगीचा ऐसे आज हम सजाएँ।
सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाता इस ईद का जश्न,
अल्लाह के 99 नाम ज़ुबान पर सभी के आएँ।।








