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बढती मंहगाई में बचत कैसे करें…! दूसरा बाजार से बनी बनाई खाघ सामग्री नहीं खरीदने से स्वत ही उनके दाम कम हो जायेगे। इसी के साथ अपने शौक सीमित कीजिए। अनावश्यक जूते, कपडों एवं फिजूल की सामग्री न खरीदें। इसके बारे में बच्चों को भी समझाये और खुद भी इसकी पालना करें। याद रखिए लोक दिखावे से कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है।#सुनील कुमार माथुर, जोधपुर, राजस्थान
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आज हर कोई बचत करने पर जोर दे रहा हैं। लेकिन वे यह नही समझा पा रहे कि इस बढती मंहगाई में बचत कैसे करें। बचत के जो तरीके हमारे एक्सपर्ट पत्र पत्रिकाओं में बताते है वे केवल पत्र पत्रिकाओं में ही छपे हुए अच्छे लगते है। चूंकि वे धरातल पर आज के समय में खरे नहीं उतरते है।
आज मंहगाई ने हर व्यक्ति व परिवार को नीम्बू की तरह निचोड़ कर रख दिया है। भला ऐसे में बचत कैसे करे। कभी कभार एक कुशल गृहणी येन केन प्रकारेण कुछ रूपये बचाती है तो बीमारी, बच्चों की फीस, रिश्तेदारी में लेन देन में ही निकल जाते है फिर आप ही बताइए कैसे बचत हो।
आज जो एक कर्मचारी को वेतन मिलता है उससे क ई गुणा ज्यादा मंहगाई है। आमदनी सीमित है और खर्चे अनेक है। हां दो नम्बर का पैसा कमाने वालों और गरीबों का शोषण करने वालों को छोड दीजिए। आज हर परिवार इस बढती बेकाबू मंहगाई से परेशान हैं। चूंकि हमारे जनप्रतिनिधि नकारा साबित हो रहे है। उन्हें तो केवल अपने लिए व अपने परिवार की सुख सुविधाओं की चिंता है। उनके भरोसे जनता जाये भाड में। यही वजह है कि आज हर क्षेत्र में बिचौलिए पनप गये है।
हमारे जनप्रतिनिधि मस्त मौला हो रहे हैं और मंहगाई द्रोपदी के चीर की भांति बढती ही जा रही हैं। आखिर इंसान करे भी तो क्या करे। उसे भी तो दो वक्त की रोटी और चाय पानी चाहिए। आम जनता को भी चाहिए कि वे बाजार में बनी चीजों से दूरी बनाए रखें और उनका इस्तेमाल न करे। आपकों जो भी खाना है वह घर पर ही बनाकर परिवारजनों के साथ खाइये। इसका पहला लाभ यह होगा कि जो भी व्यंजन या खाना बना है वह शुद्ध और पौष्टिक आहार होगा।
दूसरा बाजार से बनी बनाई खाघ सामग्री नहीं खरीदने से स्वत ही उनके दाम कम हो जायेगे। इसी के साथ अपने शौक सीमित कीजिए। अनावश्यक जूते, कपडों एवं फिजूल की सामग्री न खरीदें। इसके बारे में बच्चों को भी समझाये और खुद भी इसकी पालना करें। याद रखिए लोक दिखावे से कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है।
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