
पाकिस्तान के पूर्व मंत्री Fawad Chaudhry ने दावा किया है कि देश की असली सत्ता सेना प्रमुख Asim Munir के हाथों में है, जबकि प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मुनीर को ही वास्तविक नेता माना जा रहा है। इस बयान के बाद पाकिस्तान की राजनीति में सत्ता संतुलन को लेकर बहस तेज हो गई है।
- पाकिस्तान की राजनीति पर फवाद चौधरी का बड़ा बयान
- सेना बनाम सरकार: पाकिस्तान में सत्ता को लेकर नया विवाद
- मुनीर को बताया असली नेता, शहबाज पर साधा निशाना
- अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी उजागर हुई पाकिस्तान की सच्चाई: चौधरी
इस्लामाबाद: पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर सत्ता के असली केंद्र को लेकर बहस तेज हो गई है। पूर्व सूचना मंत्री Fawad Chaudhry ने एक सनसनीखेज बयान देते हुए दावा किया है कि देश की वास्तविक सत्ता चुनी हुई सरकार के पास नहीं, बल्कि सेना प्रमुख Asim Munir के हाथों में है। फवाद चौधरी, जो पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार में अहम पद पर रह चुके हैं, ने मौजूदा प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अब यह स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान का नेतृत्व कौन कर रहा है, और प्रधानमंत्री की भूमिका केवल औपचारिक बनकर रह गई है।
चौधरी ने अपने बयान में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के हालिया संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर भी सेना प्रमुख को ही पाकिस्तान का असली नेता माना जा रहा है। उनके अनुसार, इससे यह संकेत मिलता है कि देश में सत्ता का संतुलन लोकतांत्रिक ढांचे से हटकर सेना की ओर झुक गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान क्षेत्रीय कूटनीति में अपनी भूमिका को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
ईरान और अमेरिका के बीच संभावित वार्ता में पाकिस्तान की भागीदारी को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं। बताया जा रहा है कि जनरल आसिम मुनीर इन कूटनीतिक प्रयासों के तहत ईरान में उच्चस्तरीय बैठकों में शामिल हैं, जहां क्षेत्रीय तनाव कम करने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञ इस स्थिति को सावधानी से देख रहे हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान लंबे समय से इस आरोप का सामना करता रहा है कि वहां सेना का प्रभाव राजनीतिक निर्णयों पर हावी रहता है।
ऐसे में फवाद चौधरी का यह बयान देश के भीतर सत्ता संरचना और लोकतांत्रिक प्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े करता है। कुल मिलाकर, यह बयान न केवल पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति में हलचल पैदा कर रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश की राजनीतिक व्यवस्था और शक्ति संतुलन पर नई बहस को जन्म दे रहा है।








