भरोसा और आशीर्वाद

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भरोसा और आशीर्वाद, प्रभु की भक्ति करने से कोई धन खर्च नहीं होता है। न जाने भक्ति पर कब टैक्स लग जाये। जोधपुर, राजस्थान से सुनील कुमार माथुर की कलम से…

एक बार महापुरुषों के वचन पढ रहा था। उसमें एक कथन था कि भरोसा और आशीर्वाद कभी भी दिखाई नहीं देते है, लेकिन असंभव को भी संभव बना देते हैं मैं सोच में पड गया कि यह कैसे संभव है। मैंने अपने पिताजी से पूछा तो वो बोले , बेटा ! वक्त आने पर सब पता चल जाता हैं। मेरा भगवान पर शुरू से ही भरोसा है। सो बात आई गई हो गई।

एक दिन मैं आफिस में बैठा था कि घर से फोन आया कि तुम्हारी सरकारी नौकरी लग गयी हैं। मैने समझा आज पहली अप्रैल है सो अप्रैल फूल बना रहे हैं । लेकिन जब पिताजी ने फोन किया तो पता चला कि सही बात है।

घर आया और पिताजी को धोक दी तो उनका पहला वाक्य था कि बेटा ! एक दिन तुमने कहा था कि भरोसा और आशीर्वाद दिखाई नहीं देते हैं लेकिन असंभव को भी संभव कैसे बना देते है । आज देख लो अपनी आंखों से । जिस सरकारी नौकरी के लिए तुमने इतना संघर्ष किया। उसकी नियुक्ति का आदेश आज तुम्हारे हाथ में हैं। भगवान के यहां देर हो सकती हैं लेकिन अंधेर नहीं है।

तभी मन में विचार आया कि किसी ने सही कहा है कि किसी को भी खुश करने का मौका मिले तो छोडना नही चाहिए न जानें वो कोई फरिश्ता ही हो ।कहने का तात्पर्य यह हैं कि परमात्मा पर हर समय विश्वास रखे । आप तो बस नेक कर्म करते रहिए । सभी का मान सम्मान करें । चाहे वह छोटा हो या बडा । चूंकि गया समय वापस नहीं आता हैं। अतः हर एक पल का आंनद लीजिए।

भरोसा और आशीर्वाद, प्रभु की भक्ति करने से कोई धन खर्च नहीं होता है। न जाने भक्ति पर कब टैक्स लग जाये। जोधपुर, राजस्थान से सुनील कुमार माथुर की कलम से...प्रभु की भक्ति करने से कोई धन खर्च नहीं होता है। न जाने भक्ति पर कब टैक्स लग जाये। तब क्यों न आज से ही और अभी से ही ईश्वर की भक्ति में लग जाये । ईश्वर की भक्ति के लिए कोई समय , स्थान निश्चित नही है बस आपको जब भी समय मिले । जहां भी मिले । ईश्वर का नाम भजे । उनके नाम का स्मरण करे । वे तो अपने भक्तों के भाव के भूखे हैं।

हम तो खाली हाथ आये हैं और खाली हाथ ही जायेगे अगर कुछ साथ में जायेगा तो यह श्रेष्ठ कर्मो की गठरी ही हमारे साथ जायेग़ी जिसके कारण शायद हमें पुनः मानव देह मिल सकती हैं । कहने का तात्पर्य यह हैं कि जब हमें यह मानव जीवन मिला है तब प्रभु के नाम के स्मरण में आनाकानी क्यों । जो दूसरों की सहायता करते है उनसे प्रभु बहुत प्रसन्न होते है चूंकि अपने लिए व अपने परिजनों के लिए तो हर कोई करता हैं।

आज की यह दुनियां भरोसे पर ही टिकी हुई हैं । भरोसा कभी भी तोडना नहीं चाहिए । जिस दिन हमारे पर से दूसरों का भरोसा उठ गया उस दिन हम कही के भी नहीं रहेगे । आज हम जो कुछ है वह उस परमपिता कि कृपा से ही है । वरना उनकी कृपा बिना तो पेड का एक पता भी नहीं हिलता है । अतः भक्ति में लीन रहकर या समय देकर अपने जीवन को सोने कि तरह स्वर्णमय बना लीजिए

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