
राज्य सरकार के विकास दावों और विज्ञापन आधारित प्रचार पर सवाल उठाता एक व्यंग्यात्मक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में रोजगार, महंगाई, सड़क निर्माण और संवेदनशील मामलों पर सरकार की भूमिका को लेकर तीखी टिप्पणी की गई है।
- कविता और व्यंग्य के जरिए सरकार के विकास दावों पर हमला
- रोजगार, महंगाई और राजधानी के मुद्दे उठाता सोशल मीडिया वीडियो
- सड़क निर्माण और अंकिता हत्याकांड पर सरकार की चुप्पी पर सवाल
- विज्ञापन आधारित राजनीति पर जनता की नाराजगी हुई मुखर
(देवभूमि समाचार)
देहरादून। राज्य सरकार की नीतियों, विकास के दावों और विज्ञापन आधारित प्रचार पर तीखा प्रहार करता एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कविता और व्यंग्य के माध्यम से तैयार इस वीडियो में सरकार पर आरोप लगाया गया है कि उसने जनता को वास्तविक विकास देने के बजाय केवल विज्ञापनों के सहारे अपनी उपलब्धियों का प्रदर्शन किया है। वीडियो में बार-बार दोहराई गई पंक्तियाँ— “विज्ञापन विज्ञापन विज्ञापन, सरकार ने दिखाए केवल विज्ञापन”— जनता के बीच गहरी होती निराशा को दर्शाती हैं।
रचनाकार का कहना है कि सरकार के वादों के विपरीत न तो रोजगार के अवसर बढ़े, न ही राजधानी का स्थायी समाधान हो पाया और महंगाई भी लगातार आम लोगों की कमर तोड़ रही है। वीडियो में हाल ही में हुए जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्र से जुड़े सड़क निर्माण कार्य पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि तीन कंपनियों द्वारा टेंडर भरने तथा राज्य और देश में बनाए गए मार्ग महज चार दिनों में ही उखड़ गए, जबकि इन्हें सरकार की “महारत” और उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया गया था। इसके साथ ही अंकिता हत्याकांड जैसे संवेदनशील मामलों पर सरकार की कथित चुप्पी को भी वीडियो में प्रमुखता से उठाया गया है।
रचनाकार ने सवाल किया है कि ऐसे गंभीर मामलों में मौन रहकर सरकार अपने दामन को कैसे बचा सकती है। वीडियो के अंतिम हिस्से में समग्र राजनीतिक व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा गया है कि लगभग हर सरकार की भाषा एक जैसी होती है— “हमारी सरकार अच्छी है, हम विकास करेंगे, घर-घर रोजगार देंगे, महंगाई कम करेंगे”— लेकिन व्यवहार में इन वादों का असर जमीन पर दिखाई नहीं देता। मीडिया को विज्ञापन देकर सकारात्मक छवि गढ़ने का प्रयास किया जाता है, जबकि आम जनता बुनियादी समस्याओं से जूझती रहती है।
सोशल मीडिया पर इस वीडियो को बड़ी संख्या में लोग साझा कर रहे हैं और इसे आम जनभावनाओं की आवाज बता रहे हैं। वहीं, कुछ लोग इसे राजनीतिक व्यंग्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उदाहरण भी मान रहे हैं। वीडियो ने एक बार फिर विकास, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सरकार से सवाल पूछने की बहस को तेज कर दिया है।
नोट- संबंधित गीत की पंक्तियां, ऑडियो, वीडियो और फोटो का निर्माण एआई के माध्यम से किया गया है। जिनका किसी भी आम आदमी से कोई भी संबंध नहीं हैं। वीडियो का तात्पर्य सीधा और साफ है, जोकि उत्तराखण्ड की जनता 25 सालों से देख रही है।








