बाल साहित्य सृजन की आवश्यकता

बाल साहित्य सृजन की आवश्यकता… बच्चों का देश मासिक पत्रिका के रजत जयन्ती वर्ष पर हाल ही में 16 से 18 अगस्त 2024 को राजसमन्द (राजस्थान) में साहित्यकारों का साहित्य समागम आयोजित किया गया जिसमें देश भर से करीबन 100 साहित्यकारों ने अपनी भागीदारी निभाई और बाल साहित्य घर-घर तक कैसे पहुंचाया जाये. #सुनील कुमार माथुर, जोधपुर, राजस्थान
वर्तमान समय में बाल साहित्य सृजन की नितान्त आवश्यकता है। बाल साहित्य बच्चों को आदर्श संस्कार प्रदान करता हैं । आज से डेढ़ – दो दशक पहले तक पत्र – पत्रिकाओं के रविवारीय परिशिष्ट में पूरा एक पृष्ठ बच्चों के लिए समर्पित था जिसमें कहानी, कविताएं, चुटकुले, पहेलियां, महापुरूषों के अनमोल विचार, ज्ञान विज्ञान संबंधी जानकारी, पाठकों के पत्र, पत्र मित्रता आदि आदि प्रकाशित हुआ करते थे और रचनाकारों को सम्पादक मंडल की ओर से पारिश्रमिक व लेखकीय प्रति डाक से भेजी जाती थी जिससे रचनाकारों को प्रोत्साहन मिलता था।
धीरे-धीरे बाल साहित्य का प्रकाशन कम होने लगा और आज स्थिति यह है कि रविवारीय परिशिष्ट से बाल साहित्य एकदम नदारद हो गया है और खानापूर्ति के नाम पर जो थोड़ा बहुत प्रकाशित किया जाता हैं वह भी नेट से लेकर या सेटिंग कर के प्रकाशित किया जा रहा है जिसके कारण रचनाकारों की कलम को जंग सा लग गया हैं। हां वर्तमान समय में कुछ पत्रिकाएं बाल साहित्य के नाम से प्रकाशित हो रही हैं उनमें से चंद पत्रिकाओं को छोड दिया जाये तो शेष में सेटिंग चलती है।
आप कितने भी अच्छे रचनाकार क्यों न हो। अगर आपने सम्पादक मंडल के कहे मुताबिक न लिखा तो आपकी रचनाएं प्रकाशित नहीं होगी। कुछ तो यह भी कहते हैं कि गूगल पर सर्च करके काला पीला कर भेज दीजिए। अगर आपने ऐसा करने से इन्कार कर दिया तो वे आपको ब्लैक लिस्ट कर देगे। नतीजन नाम की चाह में अनेक रचनाकार उनकी जी हुजूरी कर प्रकाशन सामग्री प्रेषित कर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। वहीं ऐसे रचनाकारों की भी कभी नहीं है जो पुरानी पत्र पत्रिकाओं में से या दूसरे राज्यों की पत्र पत्रिकाओं में से रचनाओं में हेर फेर कर अपने नाम से प्रकाशित करवा रहे हैं। जबकी हकीकत में उन्होंने वो जगह देखी भी नहीं फिर भी लिख रहे हैं और धड़ल्ले से प्रकाशित हो रहें।
बच्चों का देश मासिक पत्रिका के रजत जयन्ती वर्ष पर हाल ही में 16 से 18 अगस्त 2024 को राजसमन्द ( राजस्थान ) में साहित्यकारों का साहित्य समागम आयोजित किया गया जिसमें देश भर से करीबन 100 साहित्यकारों ने अपनी भागीदारी निभाई और बाल साहित्य घर-घर तक कैसे पहुंचाया जाये और बाल साहित्य के उत्थान व विकास पर गहन चिंतन मनन किया गया व आशा व्यक्त की गई कि इस समागम से बाल साहित्य के प्रति आशाजनक परिणाम सामने आयेंगे।
इस प्रकार के आयोजन समय समय पर समाजसेवी संस्थाओं और राज्य व केन्द्र सरकारों द्वारा भी आयोजित किए जाने चाहिए ताकि बाल साहित्य को प्रोत्साहन मिल सके वहीं श्रेष्ठ बाल साहित्य सृजन से बच्चों में आदर्श संस्कार विकसित हो सकें। चूंकि बाल साहित्य की ये पुस्तकें न केवल कागज की पुस्तकें ही हैं अपितु बच्चों में आदर्श संस्कार विकसित कर उन्हें ज्ञानवान, संस्कारवान व चरित्रवान बनाने की एक श्रेष्ठ पाठशाला है। जो कार्य अभिभावकों व शिक्षकों को करना चाहिए वह कार्य बाल साहित्य करता हैं और बच्चों का श्रेष्ठ मनोरंजन करने के साथ ही साथ उन्हें संस्कारवान भी बनाता हैं।
अतः बाल साहित्य को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए और फिर से हर पत्र पत्रिकाओं में रविवारीय परिशिष्ट में एक पृष्ठ बच्चों के लिए आरक्षित कर बच्चों को अधिकाधिक बाल साहित्य पढ़ने को दीजिए ताकि वे अपराध की ओर अग्रसर न हो सकें व एक शान्ति मय राष्ट्र की स्थापना हो सकें।
Nice