श्रीलंका फिर धधका

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ओम प्रकाश उनियाल

आर्थिक संकट से जूझता श्रीलंका पुन: धधकने लगा है। जिसके कारण हालात बेकाबू हो चुके हैं। राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग को लेकर नागरिकों में रोष पनपा हुआ है। राष्ट्रपति को देश के आर्थिक संकट का जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। उग्र भीड़ ने राजधानी कोलंबो में राष्ट्रपति के अधिकारिक आवास व कार्यालय पर धावा बोला। गोटबाया ने सरकारी आवास छोड़ दिया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के सरकारी निवास समेत अन्य कई सरकारी भवनों पर कब्जा किया।

श्रीलंका पिछले कुछ महीनों से सोशल, इलेक्ट्रोनिक मीडिया समेत अखबारों की सुर्खियां बनता जा रहा है। बार-बार अशांति का माहौल बनने से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। सरकार विरोधी प्रदर्शन व मौजूदा हालात को देखते हुए राष्ट्रपति को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। जैसाकि, प्रधानमंत्री ने बिगड़ते हालात को देखते हुए अपने इस्तीफे की बात कही और सर्वदलीय सरकार बनाने की बात की। कभी ‘सोने की लंका’ की नाम से जाना जाने वाला श्रीलंका इन हालात से गुजरेगा शायद किसी ने सोचा भी न होगा।

यह देश चीन के चंगुल में फंसा हुआ है। वह किसी न किसी तरह अपना अधिपत्य जमाने के प्रयास में है। यदि हालात लगातार बेकाबू ही होते रहे तो सेना के हाथों में भी कमान जा सकती है। आर्थिक, राजनैतिक व सामाजिक संकट के दौर से उबरने के लिए यहां के तमाम दलों को नयी रणनीति बनानी होगी। उग्र स्थिति में कोई भी देश मदद करने के लिए आगे नहीं बढ़ेगा। उचित यही होगा कि पहले देश में किसी तरह शांति का माहौल बनाया जाए।


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

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ओम प्रकाश उनियाल

लेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार

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कारगी ग्रांट, देहरादून (उत्तराखण्ड) | Mob : +91-9760204664

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देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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