
यह प्रेरक लेख शब्दों की शक्ति, सत्य बोलने के साहस और मधुर वाणी के महत्व को रेखांकित करता है। लेखक बताते हैं कि सही समय पर बोले गए सत्य और विवेकपूर्ण शब्द किसी का जीवन संवार सकते हैं, जबकि अनावश्यक वाणी रिश्तों और समाज दोनों को नुकसान पहुँचा सकती है।
- सत्य बोलने का साहस
- मधुर वाणी का प्रभाव
- सोच-समझकर बोलिए
- शब्द बदल सकते हैं जीवन
सुनील कुमार माथुर
शब्द की ताकत को कम मत समझिए। एक छोटा-सा शब्द ‘हाँ’ और ‘ना’ ही लोगों की जिंदगी को बदल देते हैं। प्रायः देखा गया है कि लोग बातें तो बहुत करते हैं, लेकिन उसमें काम की बात कम होती है और बेकार की बातें अधिक। चूँकि लोगों को हर जगह अपनी टांग अड़ाने की आदत होती है। यही वजह है कि जहाँ जरूरत होती है, वहाँ लोग मौन धारण कर लेते हैं, जो उचित नहीं है।
अगर आप सही जगह, सही समय पर केवल सत्य का साथ देते हुए ‘हाँ’ और ‘ना’ में ही अपना जवाब दें, तो हम बेगुनाह को मुसीबत और सजा से बचा सकते हैं। इसलिए जीवन में हर वक्त अनावश्यक रूप से बातें न करें, तो बेहतर है। आपका एक ‘हाँ’ व ‘ना’ ही किसी को जीवनदान दे सकता है। इसलिए जरूरत पड़ने पर तटस्थ रहकर सत्य का साथ दीजिए। हाँ, आपके सत्य बोलने से कोई आपसे नाराज़ हो सकता है, आपसे संबंध तोड़ सकता है, लेकिन आप इसकी परवाह न करें और सत्य का साथ देकर शब्द की ताकत को देखिए। ‘हाँ’ और ‘ना’ शब्द भले ही छोटे शब्द हैं, लेकिन हैं बड़े ही ताकतवर। अतः जब भी बोलें, तब मधुर वाणी में ही बातचीत कीजिए, ताकि किसी की भावना को ठेस न पहुँचे।
अगर कोई आपको रोकने-टोकने का प्रयास करे, तो कुछ देर के लिए रुक जाइए। चूँकि ऐसा वही व्यक्ति कर सकता है जो आपका शुभचिंतक होगा, अन्यथा किसी और में ऐसी हिम्मत नहीं होगी जो आपको रोक सके। जब आप रुकते हैं, तो सोचिए कि कहीं आप गलत तो नहीं कर रहे हैं। कहते हैं कि कोई आपको रोकने-टोकने का प्रयास करे, तो उसका अहसान मानिए। चूँकि जिन बागों के मालिक नहीं होते हैं, वे जल्दी ही उजड़ जाते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि हमेशा सोच-समझकर ही बोलें। अच्छा बोलें, श्रेष्ठ बोलें। क्योंकि प्रेम और स्नेह में बहुत ही ताकत होती है।
सुनील कुमार माथुर
33, वर्धमान नगर, शोभावतों की ढाणी, खेमे का कुआँ, पाल रोड, जोधपुर, राजस्थान






