स्वयं की स्वयं दुश्मन है ‘महिला’

बेतुके प्रश्न और बेतुकी सलाह से हो रहा है नारी से नारी का बैर

इस समाचार को सुनें...

बीना राय

वर्तमान समय की नारी शिक्षा, खेलकूद संगीत अथवा नृत्य प्रतियोगिता में यहां तक कि विज्ञान के क्षेत्र में भी बढ़ चढ़ कर भाग ले रही हैं।सफल होते हुए भी देखी जा रही हैं पर फिर भी हम यह नहीं कह सकते कि आज के इस आधुनिक युग में भी नारियां अपने जीवन को पुरूषों की तरह स्वतंत्र रूप से जी सकतीं हैं अथवा अपने सपनों को साकार करने हेतु उन्हें पुरषों की तरह ही आजादी मिल जाती है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि एक नारी के तरक्की में पुरुष शायद ही रोड़ा बनता है पर नारी खुद किसी न किसी रूप में अवश्य बाधक बनती है।

एक लड़की और महिला को अपने सपने साकार करने में सबसे पहले उसके समाज के महिलाओं के ही तंज़ सुनने को मिलते रहते हैं। क्या जरूरत है खेलकूद में भाग लेने के बहाने छोटे कपड़े पहनकर अंग प्रदर्शन करने की, संगीत और नृत्य प्रतियोगिता में भाग लेना सभ्य लड़की और महिला को शोभा नहीं देता, कविता और शेरों-शायरी करने से एक औरत की छवि मैली हो जाती है, पति के पास इतना पैसा और शोहरत है तो क्यों नौकरी करती है, शादी होने के बाद आगे की पढ़ाई करने की क्या जरूरत है वगैरह-वगैरह ऐसे सब बेतुके प्रश्नों के माध्यम से अक्सर बहुत सारी औरतें कितनी ही औरतों और लड़कियों के खिलाफ बातें करते करते औरत होकर भी औरत के तरक्की में बाधक बनती रहती हैं।

नारी ही नारी के तरक्की में बाधक…

किसी औरत की जिंदगी अत्यंत नीच हरकतों में लिप्त व उसके साथ रोज मार पीट करने वाले पति के साथ नर्क बनी है तो शायद ही कोई औरत उसे दुखों से उबरने की सलाह और हिम्मत देते देखी जाती है किंतु यदि किसी कालोनी अथवा विभाग में कोई तलाकशुदा महिला रहने आ जाती है तो उसे बिना सोचे समझे अत्यंत पढ़ी लिखी महिलाओं को भी पति से नहीं निभाने का ताना देते हुए तथा उसके खिलाफ अपनी एक टीम बनाते देखा जाता है। पुरूष पुरुषों के जीवन में उतना दखलंदाजी नहीं करते जितना कि महिलाएं ही महिलाओं को अनावश्यक टिप्पणियों से परेशान और बदनाम करते देखी जाती हैं।

यदि औरतों के मेहनत,शिक्षा, गुणों, खुबसुरती और हिम्मत की कद्र सच्चे मन से अथवा बिना किसी ईर्ष्या के औरतें खुद करतीं तो शायद नारी जाति अपने जीवन को बहुत सुख और स्वतंत्रता पूर्वक जी पातीं। बहुत कम ही ऐसी महिलाएं देखी जाती हैं जो किसी अन्य महिला जो बहुत गुणी, मेहनती व उच्च शिक्षा प्राप्त की होती हैं, उनके खिलाफ वह कोई चाल न चलती हों और उनके तरक्की में वह भी खुश रहतीं हैं। किसी के गुणों और शिक्षा की कद्र करना तथा उसके छोटी छोटी कमियों को खोज खोज कर उसे असफल करने के लिए चलने वाले चालों के बजाय ऐसी गुणी और मेहनती औरत को अपने सच्चे मन से अपने मित्रों में शामिल करना दूरदर्शिता और सभ्यता की परिचायक भी तो हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Devbhoomi Samachar