बारिश का कहर :18 लोगों की मौत और 22 लापता

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शनिवार को दक्षिण और मध्य केरल में भारी बारिश के बाद कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई.वहीं कोट्टयम और इडुक्की जिलों के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन (landslide) में 22 लोगों के लापता होने की आशंका है. जिसके बाद राज्य सरकार को बचाव अभियान के लिए सशस्त्र बलों की मदद लेनी पड़ी. भारी बारिश के बाद, 11 राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), दो सेना और दो रक्षा सेवा कोर (DSC) टीमों सहित केंद्रीय बलों की टीमों को केरल के दक्षिण और मध्य भागों में तैनात किया गया है.

कोट्टयम और इडुक्की जिलों की सीमा से लगे पहाड़ी इलाकों में हुए भूस्खलन में कम से कम 22 लोगों के लापता होने की आशंका है. इडुक्की में एक कार के बह जाने के बाद दो व्यक्तियों के शव उसमें से निकाले गए. पुलिस ने कहा कि उनकी पहचान की जानी बाकी है. पठानमथिट्टा और कोट्टयम में बारिश की वजह से सोलह और लोगों की मौत की सूचना मिली है. NDRF केरल के दक्षिणी और मध्य हिस्से में 11 टीमों की तैनाती करेगी. मलप्पुरम, अलपुझा, एर्णाकुलम, त्रिशूर, पथनमथिट्टा, पलक्कड़, कोट्टायम, कन्नूर और कोल्लम में एक-एक टीम की तैनाती की जाएगी.

 

“राज्य के कुछ हिस्सों में स्थिति वास्तव में गंभीर है. हम जान बचाने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे.” मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (Pinarayi Vijayan) ने केरल की राजधानी में एक आपातकालीन बैठक के बाद अपने बयान में कहा. उन्होंने कहा कि हमने सेना, नौसेना और वायु सेना से मदद मांगी है. जिलों में राहत शिविर बनाए गए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सभी बांधों के जल स्तर की निगरानी कर रही है. मूसलाधार बारिश से तीन जिले- कोट्टयम, पथानामथिट्टा और इडुक्की सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं.

बारिश की वजह से कई लोग घायल हुए हैं जबकि कई विस्थापित हुए हैं. राज्य के अधिकतर बांध अपनी पूरी क्षमता से भर चुके हैं और भूस्खलन की वजह से पहाड़ों में बसे कई छोटे कस्बे और गांव शेष दुनिया से कट गए हैं. अधिकारियों ने बताया कि थलसेना, वायुसेना और नौसेना के जवान कोट्टयम के कूट्टीकल और इडुकी के पेरुवनथानम पहाड़ी गांव पहुंच रहें हैं.

 

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एमआई- 17 और सारंग हेलीकॉप्टर पहले ही तैयार रखे गए हैं. केरल में मौसम की स्थिति को देखते हुए वायुसेना की दक्षिणी कमान के सभी अड्डों को हाई अलर्ट पर रखा गया है.’’ प्रवक्ता ने बताया, ‘‘भारतीय थलसेना पहले ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में सैनिकों की तैनाती कर चुकी है. एक टुकड़ी को पैंगोड सैन्य ठिकाने से कोट्टयम जिले के कांजीरपनल्ली भेजा गया है जिनमें एक अधिकारी, दो जेसीओ और 30 अन्य जवान शामिल हैं.’’ भारतीय नौसेना के दक्षिणी कमान ने कहा कि वह बचाव एवं राहत अभियान मे स्थानीय प्रशासन की मदद के लिए पूरी तरह से तैयार है. नौसेना ने ट्वीट किया,‘‘गोताखोर और बचाव टीम सूचना मिलते ही तैनाती के लिए तैयार है. एक बार मौसम अनुकूल हो तो हेलीकॉप्टर से मदद शुरू करने के लिए तैयार हैं.’

 

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने छह जिलों – कोट्टयम, पठानमथिट्टा, त्रिशूर, एर्नाकुलम, इडुक्की और पलक्कड़ में रेड अलर्ट जारी किया है. इनमें से अधिकांश जिलों में शुक्रवार रात से भारी बारिश हुई है. आसपास के कई बांध भर गए हैं और दबाव को कम करने के लिए कुछ के गेट खोल दिए गए थे. मौसम विभाग ने कहा कि कोट्टयम के कुछ इलाकों में पिछले 24 घंटों में 30 सेंटीमीटर बारिश हुई है, कुछ क्षेत्रों में तेज हवाएं चलेंगी.

 

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने बारिश की स्थिति की समीक्षा करने के लिए शनिवार शाम को उच्च स्तरीय बैठक की और प्रभावित इलाकों में बचाव कार्य और तेज करने का फैसला किया. मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि सभी सरकारी एजेंसियों को निर्देश दिया गया कि वे प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को बचाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए और उन इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजे जहां पर बाढ़ या भूस्खलन का खतरा है. विजयन ने जिलाधिकारियों को भी प्रभावित और विस्थापित किए गए लोगों के लिए राहत शिविर खोलने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि इन शिविरों का परिचालन कोविड-19 नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए किया जाना चाहिए.

 

मौसम विभाग द्वारा 19 अक्टूबर तक बारिश की चेतावनी दिए जाने के मद्देनजर बैठक में यह भी फैसला किया गया कि 18 अक्टूबर तक पथनमथिट्टा के घने जंगलों में स्थित सबरीमाला अयप्पा मंदिर में किसी भी तीर्थयात्री को जाने की अनुमति नहीं दी जाए. बयान में कहा गया कि उच्च शिक्षण संस्थान जिन्हें 18 अक्टूबर से खोला जाना था अब 20 अक्टूबर से शुरू होंगे. विजयन ने राज्य के लोगों से अगले 24 घंटे के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की है.

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