कविता : मैं मेरी मां के बारे में क्या लिखूं

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सुनील कुमार माथुर

33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)

मैं मेरी मां के बारे में क्या लिखूं
उसके बारें में लिखना यानि
सूर्य को दीपक दिखाना होगा
वह तो ममता और करूणा की सागर थी
वह एक कुशल नारी थी
भले ही वह कम पढी लिखी थी फिर भी
बहुत कुशल व हुनर वाली थी
सर्वप्रिय और हर क्षेत्र में
वह अग्र पंक्ति में खडी रहने वाली थी
वो तो त्याग व तपस्या की देवी थी
घर – परिवार और तमाम रिश्तों को
एक सूत्र में बांधने वाली नारी थी
हिम्मतवाली और दिलेर थी
थानेदार साहब कि बेटी जो थी
मैं मेरी मां के बारे में क्या लिखूं
उसके बारें में लिखना यानि
सूर्य को दीपक दिखाना होगा
संयुक्त परिवार को मणियो की माला जैसे
एकता के सूत्र में जो बांध रखा था
सभी बच्चों को उच्च शिक्षा और
आदर्श संस्कार देकर
घर – परिवार में ज्ञान के दीपक को जलाएं रखा
मैं मेरी मां के बारे में क्या लिखूं
वह करूणा , दया , ममता व वात्सल्य
प्रेम व स्नेह को बनायें रखनें वाली नारी थी
संकटों से कैसे उबरा जायें
यह वह खूब जानती थी

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