दो अक्टूबर-कहीं खुशी कहीं गम

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ओम प्रकाश उनियाल

दो अक्टूबर को समूचा राष्ट्र दो महापुरुषों का जन्मदिन मनाता है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री। महात्मा गांधी ने शांति और अहिंसा का नारा तो दिया ही था साथ ही साथ स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग करने पर बल दिया। स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री ने ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा दिया।

जिससे सीमाओं के प्रहरियों एवं अन्नदाता में जोश बना रहे व सदैव सजग रहें। दोनों महापुरुषों ने सादगीभरा जीवन व्यतीत किया। देशहित को सर्वोपरि माना। बेशक, भारत आज विश्व में अपना परचम लहराए हुए है मगर भीतर अनेकों समस्याओं से जूझ रहा है। जिनसे निपटने के लिए गांधी और शास्त्री की नीतियों का अनुसरण करने की भी आवश्यकता है।

गांधी और शास्त्री जयंती पर इनकी समाधियों पर श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। गांधी जयंती पर देश में जगह-जगह प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाता है। जिनमें गांधी साहित्य का प्रचार किया जाता है। खादी-वस्त्रालयों में खादी-वस्त्र खरीदने पर छूट दी जाती है। खादी केवल वस्त्र नहीं एक विचारधारा है जो कि स्वदेशी की भावना जागृत कराती है।

जहां एक ओर देश इस दिन इन महान विभूतियों का जन्मदिन धूमधाम से मनाता है वहीं उत्तराखंड में दो अक्टूबर को ‘रामपुर तिराहा (मुजफ्फरनगर) कांड की बरसी मनायी जाती है। 2 अक्टूबर 1994 का दिन राज्य आंदोलनकारियों के लिए ‘काला अध्याय’ साबित हुआ था।

राज्य की मांग को लेकर दिल्ली कूच कर रहे आंदोलनकारियों पर तत्कालीन मुलायम सरकार में पुलिस ने जिस प्रकार से बर्बरता ढाही वह ब्रिटिश हुकुमत की याद ताजा कराती है। इस कांड में कुछ आंदोलनकारी शहीद भी हुए थे। एवं अनगिनत घायल। इस घटना का स्मरण करते हुए आज भी जनमानस सिहर उठता है। आंसू छलक आते हैं आंखों में। आओ, शहीद राज्य आंदोलनकारियों का स्मरण करते हुए उन्हें भी श्रद्धापुष्प अर्पित करें।


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

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ओम प्रकाश उनियाल

लेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार

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कारगी ग्रांट, देहरादून (उत्तराखण्ड) | Mob : +91-9760204664

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देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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