बिहार का मुंगेर नगर ‘संस्कृतियों का संगम’

राजीव कुमार झा
सदियों से वसुधैव कुटुंबकम् हमारी संस्कृति का मूल स्वर रहा है, लेकिन इसके बावजूद हमारे रोजमर्रा के मौजूदा जीवन में अक्सर कई प्रकार के विवाद समाज में विचलन की परिस्थितियों को कायम करते हैं! साहित्य अपने बुनियादी धरातल पर हमें सदैव चिंतन की ओर अग्रसर करता है और अपने समय और समाज के प्रति हमारी हमारी संवेदना में सार्थक-सकारात्मक प्रवृत्तियों का संचार करता है!
धर्म और अध्यात्म की परंपरा से भी हमें सदैव जीवन में सामंजस्य का संदेश मिलता रहा है. मुंगेर को योग नगरी भी कहा जाता है और यहां का योगाश्रम प्रसिद्ध है.यह गंगा नदी के तट पर बसा नगर अत्यंत प्राचीन है और महाभारत में अंग महाजनपद की राजधानी के रूप में इसका उल्लेख है. दुर्योधन ने कर्ण को यहां का राजा बनाया था.आज भी मुंगेर में कर्णचौरा उसकी याद दिलाता है.
भारत संसार का एक प्राचीन देश है और हमारी संस्कृति में सदैव लघुता की जगह विराटता और स्थूलता की जगह सूक्ष्मता को महत्व दिया गया है! इस संदर्भ में हमें निरंतर अपने वर्तमान जीवन से जुड़ी परिस्थितियों पर विचार विमर्श जारी रखना होगा और समाज-संस्कृति के अलावा देश और राष्ट्र के विराट जीवन से जुड़े सवालों पर दृष्टिपात करना सबके जीवन का उद्देश्य होना चाहिए!
सीता भारतीय नारियों के जीवन की प्रेरणा स्रोत मानी जाती हैं और मुंगेर की धरती से उनकी जीवन कथा का संबंध रहा है! यहां का सीताकुंड प्रसिद्ध है. यहां गर्म पानी के सुंदर झरने हैं. हमारे देश के इतिहास के उत्तर मध्यकाल में दसवीं-ग्यारहवीं शताब्दी के आसपास बंगाल में पालवंश के राजाओं का शासन था और मुंगेर में पाल राजाओं के सामंत रहते थे और यहां से गंगा नदी के जलमार्ग के सहारे उत्तर और दक्षिण बिहार के सुदूर इलाकों की देखरेख किया करते थे.
आधुनिक काल में बिहार के अलग राज्य बनने के बाद अंग्रेजों ने मुंगेर को एक जिला बनाया और मुंगेर किले के भीतर ही अपना कलक्टर का कार्यालय भी स्थापित किया . आज भी मुंगेर के कलक्टर का कार्यालय इसी जगह पर स्थित है.मुंगेर का किला काफी विशाल है और इसके कई दरवाजे हैं, जिनमें लाल दरवाजा प्रमुख है.इस किले में आम के सुंदर बाग और उद्यान के अलावा बच्चों का एक पार्क भी बना है! मुंगेर और खगड़िया के बीच अब गंगा नदी पर पुल बन जाने से इस नगर का रेल संपर्क अब देश के सुदूर नगरों से भी कायम हो गया है !
देश का यह ऐतिहासिक नगर आजादी के आंदोलन के दौरान स्वातंत्र्य साधना का भी केन्द्र बना रहा और धर्म अध्यात्म योग के साथ साहित्य कला की चेतना भी यहां निरंतर पल्लवित पुष्पित होती रही.बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की स्मृति में स्थापित श्रीकृष्ण सेवा सदन पुस्तकालय के रूप में मुंगेर वासियों के अध्ययन और चिंतन मनन का प्रमुख केन्द्र है. कोलकाता में अंग्रेजों के हाथों अपना शासन गंवाने वाले मीर कासिम ने वहां से बेदखल होकर मुंगेर में अपना शासन स्थापित किया और यहां के किले के भीतर बंगाल के इस नवाब के शासन के अवशेष आज भी देखने योग्य हैं और इनमें शाही कब्रिस्तान भी शामिल है.
¤ प्रकाशन परिचय ¤
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From »राजीव कुमार झाकवि एवं लेखकAddress »इंदुपुर, पोस्ट बड़हिया, जिला लखीसराय (बिहार) | Mob : 6206756085Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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