स्मृति शेष : कोमल स्वभाव व व्यक्तित्व के धनी नट्टू काका नहीं रहे

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सुनील कुमार माथुर

मृत्यु एक शाश्वत सत्य है और मनुष्य अपने सद् कर्मों के माध्यम से ही जीवन को सार्थक बना सकता हैं । यह संसार एक सराय है और यहां आकर कोई सदा के लिए नहीं रह सकता हैं । इंसान , जीव – जन्तु , पशु-पक्षी, पेड पौधे हर कोई अपना कर्म करता है और जब उसका कर्म पूरा हो जाता हैं तो वह यह नश्वर संसार को छोड़ कर इंसान परलोक सिधार जाता हैं ।

जैसे पुष्प सवेरे-सवेरे खिलते है और दिन भर अपनी खुश्बू देते है और शाम पडते – पडते पुष्प मुरझा जातें है । अतः जब व्यक्ति से हमारा लगाव हो जाता है तो फिर उसके चले जानें पर अपार दुख होता हैं । यह कटु सत्य है कि जो आता है उसे एक न एक दिन अवश्य ही जाना है । बाद में तो यादें शेष रह जाती है ।

रविवार 3 अक्टूबर 2021 का दिन वह क्रूर दिन था जब तारक मेहता का उल्टा चश्मा सीरियल में नट्टू काका की भूमिका निभाने वालें अभिनेता घनश्याम नायक का मुम्बई में निधन हो गया । वे 77 वर्ष के थे और कैंसर रोग से पीडित थे उनके निधन से तारक मेहता का उल्टा चश्मा सीरियल देखने वालें दर्शकों के बीच शोक की लहर छा गयी । नट्टू काका और बागा की गजब की जोडी थी । वे हर वक्त मजाक के मूड में रहते थे और सेठजी जेठालाल के वफादार थे ।

नट्टू काका ने न केवल अपने सेठ जेठालाल को ही मान सम्मान दिया अपितु टप्पू को भी छोटा सेठजी कहकर सम्मान करते थे । वे न केवल गोकुलधाम सोसायटी के लोगों का ही सम्मान करते थे अपितु दुकान पर आने वालें हर ग्राहक को भगवान समझते थे और उनके साथ शालीनता के साथ व्यवहार करते थे । यहीं वजह है कि सेठ जेठालाल व बापू जी ( चंपक चाचा ) ने कभी भी नट्टू काका को नौकर नहीं समझा अपितु परिवार के एक सदस्य के रूप में ही माना चूंकि उनके मन में सदैव मान सम्मान का भाव रहा ।

नट्टू काका एक आदर्श व नेक कलाकार थे । उन्होंने कई बार वेशभूषा बदल – बदल कर अपनी प्रतिभा से जन जन को हंसाया । आज वे इस नश्वर संसार में नहीं रहें केवल यादे ही रह गयीं है । आज नट्टू काका व बागा की जोडी बिछड गयी । तारक मेहता का उल्टा चश्मा सीरियल के दर्शकों के दिलों में अपनी गहरी छाप छोड़ गयें । उनकी कमी को पूरा कर पाना अब कठिन है ।

वे सत्य के पक्षधर थे व सत्य बात बोलने से कभी नहीं घबराये । उनकी सोच रचनात्मक थी । वे सादा जीवन और उच्च विचारों के धनी थे । वे निरन्तर सेवा कार्य में लगें रहें । उन्होंने हर किसी का संकट के समय में एकजुटता , आत्मविश्वास और मनोबल बढाया । उनमें अद् भूत संगठन शक्ति थी । उनकी जैसी स्पष्टवादिता , सादगी व अपनत्व अब कहा देखने को मिलता हैं । कौन कहां व कब मिलें और कैसे बिछड जायें यह आज तक कोई भी नहीं जान पाया हैं ।

वे सदा कहा करते थे कि कभी भी किसी का विश्वास न तोडे चूंकि वे खरे सोने की तरह थे । उन्होंने उस सोने की चमक (विश्वास) को कभी भी खोने नहीं दिया । उनका कार्य कई मायनों में याद रखा जायेंगा । अपने विचारों के वे पक्के धनी थे । आज भले ही वे हमारे बीच में नहीं है लेकिन उनकी यादें और उनके योगदान को हम कभी भी भूला नहीं पायेंगे । परिस्थितियां कितनी भी विपरीत हो , लेकिन हमें हार नहीं माननी चाहिए चूंकि ईश्वर एक दरवाजा बंद करता है तो दूसरें कई दरवाजे खोल देता हैं । यह उनका मूल मंत्र था ।

सरल , सौम्य , बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी , सेवाभावी, कोमल हृदयधारी , सर्वत्र लोकप्रिय, सादगी पूर्ण जीवन, दयाभाव, मधुरवाणी , धार्मिक व्यक्तित्व सदैव आपकी उपस्थिति का अहसास दिलाता रहता हैं । आप सम्पूर्ण परिवार के लिए अथाह शक्ति के स्त्रोत थे । आपने जीवन में हमें सत्य , श्रम एंव निःस्वार्थ कर्म का मार्ग दिखाया । आपकी पावन स्मृति को मन में संजोए , हम इस मार्ग पर सदैव चलेंगे आपका अपूर्ण तेजस्व पूरे परिवार को सदा ही प्रभावित करता रहेगा ।

वे किसी परिचय के मोहताज नहीं थे । उन्होंने समाज में जो अनुकरणीय योगदान दिया वह बेमिसाल ही नहीं बल्कि मानवीयता का एक आदर्श उदाहरण भी हैं । वे सामाजिक व धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से जुड़े रहकर मानव मात्र कल्याण के लिए समर्पित रूप से सेवा देते रहे । वे करूणा , मानवता एवं संवेदनशीलता के प्रेरक पुरूष थे । वे अपने आप में वटवृक्ष की भांति एक संस्थान थे । समाज सेवा को जीवन का ध्येय मानने वाले सक्रियता से जुड़े रहकर तन , मन व धन से सहयोग किया ।

वे कहा करते थे कि यह संसार बहुत बडा व विशाल है । इसमें अपने आप को सर्वश्रेष्ठ , आदर्श , बलवान , ज्ञानवान समझना बहुत बडी भूल होगी । अतः हमे अंहकार , झूठी शान से दूर रहकर सेवा भाव से सभी की सेवा करनी चाहिए व सत्य को कभी भी दबाना नहीं चाहिए । चूंकि सत्य सदा सत्य ही रहता है । वे कहा करते थे कि अगर हम किसी का भला नहीं कर सकते तो हमें किसी का बुरा करने का कोई अधिकार नहीं है ।

उनके विचार , धर्मपरायणता एवं उच्च आदर्श ही हमारे प्रेरणास्रोत एवं सम्बल हैं । परमपिता परमेश्वर में लीन आपकी दिव्य आत्मा की हमारे जीवन पर अंकित अमिट छाप हमें सदैव सेवा , स्नेह एवं उदारता से जीने को प्रेरित करता हैं । हमारे जीवन में आपके जाने से उत्पन्न शून्यता कभी नहीं भूल सकतें है । यादों में हर पल जीते रहेंगे आप । हमारे प्रेरणास्रोत बनें रहेंगे आप । उन्होंने अनुशासित , आदर्शवादी , संघर्षशील कलाकार के रूप में अपनी पहचान कायम करते हुए जीवन में कई महत्वपूर्ण कार्य किये समाज को उनकी कमी हमेशा खलती रहेंगी ।

धार्मिक प्रवृत्ति , अनुशासन प्रेमी , दीन दुखियों के प्रति सेवाभाव, दान पुण्य में विश्वास , उनका जीवन तो एक खुली किताब की तरह था । वे सभी को मान सम्मान देते थे । छोटे व बडे सभी के प्रति आदर भाव रखते थे । सादा जीवन और उच्च विचारों के धनी थे । मेलमिलाप की प्रवृत्ति, सही मायने में वे एक तरह से प्रेम के दीपक थे । प्रेम, स्नेह व भाईचारे की मिसाल थे । वे नम्र स्वभाव, स्वाभिमानी, न्यायप्रिय, कर्मठ , निष्ठावान, शीतल स्वभाव, परोपकारी, नेक निर्भिक व कर्मयोगी थे । ऐसे कर्मनिष्ठ , सेवाभावी एवं आध्यात्मिकता के प्रतीक पुरूष को शत् शत् नमन् ।

जिंदगी के अंधेरों में वह जलती मशाल थे ।
मुसीबतों से बचने को वह समाज की ढाल थे ।
वे त्याग की एक मिशाल थे।

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