17 गोल्ड मेडल जीत चुकी है “मयूरी”

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जल बिन मछली नृत्य बिन बिजली” …. छोटी उम्र में नाचे मयूरी के नाम से जानी जाती है। हो सकता है कि उसने अपनी माँ के गर्भ से आते हुए यह भाग्य लिखा हो। नृत्य भले ही सिखाया जा सकता है, लेकिन अच्छा कलाकार वही होता हैं जिसके खून मे ही कला छुपी हो। ऐसी ही एक कलाकार हैं सिने बाल कलाकार, एम्बेसडर, लावणीश्री, डॉ. विद्याश्री शिवाजी येमचे…

जन्म – 2 दिसंबर 2012 माता-पिता अपने बच्चों के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। आपके बच्चे बड़े होने चाहिए। हर कोई अपने सपने को पूरा करना चाहता है। विद्याश्री के माता-पिता भी इससे अछूते नहीं हैं। विद्याश्री के डान्स शो और सामाजिक कार्यों के लिए समय निकालने के लिए उनकी माँ शिवानी यमचे ने स्कूल टीचर की नौकरी छोड़ दी।

कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है। छोटी सी विद्याश्री को अब तक जितने पुरस्कार मिले हैं, उसे देखकर आप दंग रह जाएंगे। वह , डॉक्टरेट डिग्री, इंटरनेशनल लिटिल प्रिंसेस अवार्ड ,जीवन गौरव पुरस्कार से सम्मानित होने वाली सबसे कम उम्र की सामाजिक कार्यकर्ता हैं। महज 7 साल की उम्र में उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया था। विद्याश्री ने 4 अंतर्राष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीते हैं। विद्याश्री 1) अंतर्राष्ट्रीय मॉडलिंग स्वर्ण पदक 2) लोक नृत्य लावणी स्वर्ण पदक 3) सेमी शास्त्रीय स्वर्ण पदक 4) वेस्टन नृत्य स्वर्ण पदक एक अंतर्राष्ट्रीय स्वर्ण पदक विजेती कलाकार हैं। वह कुल 17 गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं और अब तक 177 स्टेज शो कर चुकी हैं।

विद्याश्री को 35 विश्व रिकॉर्ड और राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय 1500+ पुरस्कार, 300 विश्व रिकॉर्ड प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया है।वह अब तक 75 लघु फिल्मों में मुख्य भूमिका निभा चुकी हैं।जल्द ही वह 3 फिल्मों में नजर आएंगी। उन्होंने विभिन्न भाषाओं में लघु फिल्मों के लिए विश्व रिकॉर्ड बनाया है (मराठी, हिंदी, अंग्रेजी, तेलुगु, कन्नड़, बंजारा) उन्होंने विभिन्न भाषाओं में लघु फिल्मों में अभिनय किया है।उनकी जिद की बात करें तो… जब पहली शॉर्ट फिल्म की शूटिंग चल रही थी, तब उन्होंने एक अनाथ लड़की की भूमिका निभाई थी। शूटिंग मलबे के एक बड़े गोदाम में चल रही थी।

शूटिंग के समय ऑन-कैमरा, गोदाम के पिछले हिस्से में लगे मलबे के अंदर का शिष्या विद्याश्री के पेट में घूस गया था.. खून बह रहा था। कैमरा फ्रंट होने की वजह से बैक में लगे ग्लास को कोई नहीं देख सका। शूट कट ना हो इस लिये विद्याश्री ने कांच का तुकडा पेट मे लगने के बाऊ जुद वन टेक शूट पूरा किया l विद्याश्री को अंतरराष्ट्रीय डॉक्टरेट से सम्मानित किया गया है। 4 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला डान्स शो किया था। उनके गुरु लावणी सम्राट किरण कुमार जी कोरे हैं। एक्टिंग गॉड फादर माननीय निर्देशक आनंद जी शिंदे बाबाश्री को मानती हैं।

विद्याश्री जहां नृत्य के अपने शौक को विकसित कर रही हैं, वहीं उन्हें सामाजिक कार्यों में भी आनंद आता है।शो में मिलने वाली पूरी राशि अनाथों, मानसिक रूप से मंद और कुष्ठ रोगियों की मदद के लिए दान कीया है। “किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार किसी के वास्ते हो दिल में प्यार जीना इसी का नाम है ” पिछले चार वर्षों से 31 दिसंबर जश्न अनाथ बच्चो वृद्धाश्रम के सभी लोगो के साथ बनाने के लिए चार साल से 30 डिसेंबर को सुया घ्या पोत घ्या के माध्यम से स्कूल और गली गली मे घूम कर पैसे एकटा करती है उससे नम किन मिठाई फल खरित कर अनाथ आश्रम के बच्चो और बुजूर्गो के साथ नया साल सेलिब्रेट करती हैl

उन्होंने कोविंड में तालाबंदी के पहले तीन महीनों में पावड़े वाडीनाका यहाँ ड्यूटी पुलिस कर्मियों को चाय वितरित की हैं। विद्याश्री ने तीन दिन में जरूरतमंद बच्चों को 5000 बिस्किट प्याकेट बांटे हैं। दूसरे चरण के लॉकडाउन में जरूरतमंदों को बोतलबंद पानी,खिचडी, बिस्कुट और मास्क बांटे हैं। और 19 सिंगल व क्वारंटाइन लोगों को दो टाइम का टिफिन मदत के रूप में दिया हैं। विद्याश्री को सबसे कम उम्र की सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज है। उन्हें “ब्रांड एंबेसडर” की उपाधि से सम्मानित किया गया है।विद्याश्री वर्तमान में भारतीय महा क्रांति सेना महिला उपाध्यक्ष नांदेड़ जिला महिला मोर्चा हैं।समाज हमेशा अच्छा काम करने वाले को परेशान किए बिना नहीं रहता।

4 साल की उम्र में, पहले स्टेज शो के बाद, एक करीबी रिश्तेदार ने उसे मिठाई के साथ जहर दिया। वह 3 महीने से चुप थी। उसके गले से आवाज नहीं निकली(गुंगी बन गई)। उसके माता-पिता ने उसे एक फूल की तरह रखा हैं।

उन्होंने 5 साल की उम्र में अपना पहला राज्य स्वर्ण पदक जीता, जिसके बाद उन्हें अपमानित किया गया और उस नृत्य वर्ग से निष्कासित कर दिया गया जिसमें वह नृत्य का अध्ययन कर रही थीं। उस समय उनके गुरु किरण कुमार जी कोरे ने नृत्य सिकाणे मे मदत की । जीवन के सफर में विद्याश्री कई सपनों के साथ राह पर चल रही हैं। विरासत के बिना, वह फ़िल्म कला और सामजिक कार्य में आगे बड रही हैं और आगे बढ़ती रहे गी। इसमें कोई संदेह नहीं है । ऐसा लगता है कि फड़फड़ाते पंखों का कोई क्षितिज नहीं है

“यही प्रार्थना है और शुभ कामना हैं विद्याश्री और आगे बढ़ती जाये l

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