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बिक रही शराब, पी रहे लोग : राणा

बिक रही शराब, पी रहे लोग : राणा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शराबबंदी का निर्णय वास्तव में सराहनीय है, लेकिन कानून के रक्षक ही अपने संरक्षण मे देशी बिदेशी बनवा बिकवा कर मोटी रकम बना रहे हैं… #सतीश राणा

बिहार की नितीश सरकार ने शराब बेचने व पीने पर पूरी तरह से रोक लगा दी हैं । इसके लिए कड़े कानून भी बना दिए, लेकिन सच यही है कि शराब बिक रही है और लोग पी रहे हैं। हां, अब खुलेआम कोई नहीं पीता है, बल्कि घरों में…! पार्टियां भी घरों में ही दी जाती हैं। शराब विक्रेताओं ने अब बिक्री का पैटर्न बदल दिया है। बिक्री के लिए अब ‘विशेष कोड’ का इस्तेमाल किया जाता है, फिर झोले में रखकर बोतल ग्राहक के घर तक पहुंचाई जाती है।

कस्टमर देखकर दाम दोगुने व चौगुने वसूले जाते हैं। रिस्क अधिक होने की बात कहकर दाम अधिक वसूले जा रहे हैं। कानून के भय से खुलेआम पीने का साहस इक्के-दुक्के ही कर रहे हैं। सरकार ने नियम तो कड़े कर दिए, लेकिन यह तंत्र विकसित नहीं किया गया कि घरों में पीने वालों की पहचान कैसे होगी? उनपर कार्रवाई कैसे होगी? जिस मुहल्ले में पांच-छह घर के लोग बेचने वाले हैं, वे एक ‘जासूस’ भी रखते हैं। वह नजर रखता है कि कहीं पुलिस की गाड़ी तो नहीं आ रही है।

शराबबंदी रोकने की जिम्मेवारी पुलिस और उत्पाद विभाग की है। पुलिस शराबबंदी के नाम पर रोज चांदी काट रही है। यदि वह 50 कार्टन शराब जब्त करती है तो उत्पाद विभाग को सिर्फ 20 कार्टन ही शराब हाथ लगती है। 30 कार्टन कहां गए, किसी को पता नहीं। सवाल कौन करेगा? पावर तो उसी के पास है? 30 कार्टन शराब में से कुछ पुलिस वाले गटक जाते हैं और कुछ उन व्यवसायियों के हाथों दोगुने दाम पर बेच देते हैं, जो पुन: चौगुने दाम पर ग्राहकों को सप्लाई करते हैं।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शराबबंदी का निर्णय वास्तव में सराहनीय है, लेकिन कानून के रक्षक ही अपने संरक्षण मे देशी बिदेशी बनवा बिकवा कर मोटी रकम बना रहे हैं कभी कभी गांवो के समाजसेवियो द्वारा शराब बेचने वालो के बिरोध करने पर ये दबे जुबान समझाते हैं कि ऊपर से नीचे तक के लोगो को कमिशन देना पड़ता हैं तब बनाते या बेचते हैं थाने मे शिकायत करने पर भ्रष्ट अफसरो द्वारा शराब माफीआओ को सूचना दे देते हैं कि माल हटा लो आज हम लोग छापा मारने वाले हैं फलां आदमी ने शिकायत की हैं।

अब शराब माफिया थाने मे सूचना देने वालो के जान के दुष्मन बन जाते हैं और शराब माफिया के कहने पर भ्रष्ट अफसरो द्वारा सूचना देने वालो को अपने पद पावर का दुरूपयोग कर झूठे झूठे अपराधिक मामलो मे फसाने की धमकी देते या फंसा देते हैं। ऐसे मे आम जनता क्या करे . वास्तव मे बिहार मे पूर्णतया शराबबंदी असफल हैं। यदि वास्तव में शराबबंदी पर पूरी तरह से रोक लगानी है तो ईमान्दार अफसरो के नेतृत्व मे छापामार दस्ते बनाने होंगे, जो समय-समय पर विभिन्न जगहों पर छापेमारी करें।

इसी तरह कुछ ऐसे ईमान्दार अफसरो के नंबर जारी करने होंगे, जिसपर लोग बेखौफ सूचना दे सकें। दो-तीन वाट्सएप नंबर भी जारी करने चाहिए। इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई भी हो और सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाए, तभी लोग आगे आएंगे। तभी शराब बंदी पर कुछ हद तक रोक लगाई जा सकेगी।

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बिक रही शराब, पी रहे लोग : राणा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शराबबंदी का निर्णय वास्तव में सराहनीय है, लेकिन कानून के रक्षक ही अपने संरक्षण मे देशी बिदेशी बनवा बिकवा कर मोटी रकम बना रहे हैं... #सतीश राणा

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