
भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज और एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता Jaspal Rana के निधन से खेल जगत में शोक की लहर है। महज 18 वर्ष की आयु में विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले राणा ने खेल के साथ-साथ राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई। हाल के वर्षों में वह भारतीय निशानेबाजों के हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में नई प्रतिभाओं को तैयार कर रहे थे।
- एशियाई खेलों के स्वर्णिम नायक जसपाल राणा को देश ने खोया
- निशानेबाजी के महानायक का निधन, खेल जगत में शोक की लहर
- मनु भाकर जैसे खिलाड़ियों को तराशने वाले गुरु नहीं रहे
- 18 साल की उम्र में विश्व रिकॉर्ड, फिर राजनीति में भी बनाई पहचान
देहरादून। भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले दिग्गज निशानेबाज और कोच Jaspal Rana का निधन खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाले राणा ने अपने शानदार खेल प्रदर्शन, रिकॉर्ड उपलब्धियों और कोचिंग के माध्यम से देश की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया। उनके निधन की खबर से खेल प्रेमियों, खिलाड़ियों और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों में शोक की लहर दौड़ गई है। जसपाल राणा का नाम भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
उन्होंने बेहद कम उम्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और मात्र 18 वर्ष की आयु में विश्व रिकॉर्ड बनाकर अंतरराष्ट्रीय खेल जगत का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। उनकी यह उपलब्धि भारतीय खेल इतिहास की सबसे उल्लेखनीय सफलताओं में गिनी जाती है। राणा ने राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में भारत को अनेक पदक दिलाए। विशेष रूप से वर्ष 2006 में आयोजित Asian Games Doha 2006 में उनके द्वारा जीते गए तीन स्वर्ण पदक भारतीय खेल इतिहास की यादगार उपलब्धियों में शामिल हैं।
उनकी सटीक निशानेबाजी, मानसिक दृढ़ता और निरंतर प्रदर्शन ने उन्हें देश के सबसे सफल पिस्टल निशानेबाजों की श्रेणी में स्थापित किया। खेल के मैदान से बाहर भी जसपाल राणा की सक्रियता उल्लेखनीय रही। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई और वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में Narendra Modi की पार्टी Bharatiya Janata Party के टिकट पर टिहरी गढ़वाल संसदीय सीट से चुनाव मैदान में उतरे। हालांकि चुनावी सफलता उन्हें नहीं मिल सकी, लेकिन उन्होंने राजनीतिक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई।
बाद में वर्ष 2012 के विधानसभा चुनावों के दौरान वह Indian National Congress के प्रचार अभियानों में भी सक्रिय दिखाई दिए। हाल के वर्षों में उन्होंने कोच की भूमिका में भारतीय निशानेबाजी को नई दिशा देने का कार्य किया। हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षित किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया। भारतीय महिला निशानेबाजी की नई पीढ़ी को संवारने में उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय माना जाता है। उनके मार्गदर्शन में कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सफलता हासिल की।
जसपाल राणा केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने खेल, प्रशिक्षण और सार्वजनिक जीवन तीनों क्षेत्रों में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई। उनका जीवन संघर्ष, अनुशासन, समर्पण और उत्कृष्टता का प्रतीक रहा। उनके निधन से उत्तराखंड ही नहीं, पूरे देश ने एक ऐसे खेल नायक को खो दिया है, जिसने अपने प्रदर्शन और व्यक्तित्व से करोड़ों लोगों को प्रेरित किया। भारतीय खेल जगत हमेशा उन्हें एक महान निशानेबाज, कुशल प्रशिक्षक और बहुआयामी व्यक्तित्व के रूप में याद रखेगा।





