किसानों को दिया गया नई तकनीक से पाैंधरोपण का प्रशिक्षण

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किसानों को दिया गया नई तकनीक से पाैंधरोपण का प्रशिक्षण, भारत में विविध कृषि-जलवायु, विभिन्न तरह की मृदा और समृद्ध पादप विविधता के बावजूद वैश्विक फूलों की खेती का केवल 0.6% हिस्सा ही है। पढ़ें गया से देवभूमि समाचार के वरिष्ठ संवाददाता अर्जुन केशरी की रिपोर्ट-

गया, बिहार। गया जिले के डोभी प्रखंड अंतर्गत बकसोती ग्राम में सीएसआईआर फ्लोरीकल्चर मिशन के दौरान किसानों कों दिया गया नए तकनीक से पौधा रोपन करने का प्रशिक्षण। इस मिशन का संचालन कर्ता लखनऊ से आई हुई शोधकर्ता स्नेहा कुमारी एवं किसान सलाहकार वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ विक्रमा सिंह, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डॉ दयानंद शंकर ने किसानो कों गेंदा, गुलाब, रजनीगंधा आदि फूल के पौधों कों लगाने का सही तकनीक बताया।

उन्होंने बताया कि सही तकनीक अपनाकर फूलो का खेती कर बहुत लाभ कमाया जा सकता हैं। यह अभियान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद निदेशक, बागवानी, खादी और ग्रामोद्योग आयोग, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण, ट्राइफेड, खुशबू और स्वाद विकास केंद्र कन्नौज, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) और विश्वविद्यालयों के सहयोग से कार्यान्वित किया जा रहा है।

भारत में विविध कृषि-जलवायु, विभिन्न तरह की मृदा और समृद्ध पादप विविधता के बावजूद वैश्विक फूलों की खेती का केवल 0.6% हिस्सा ही है। विभिन्न देशों से हर साल कम से कम 1200 मिलियन डॉलर के पुष्प उत्पादन एवं आयात किए जा रहे हैं। इस अभियान के तहत मधुमक्खी पालन के लिए वाणिज्यिक फूलों की खेती, मौसमी यानि सालभर होने वाले फूलों की खेती, जंगली फूलों की फसलों पर ध्यान दिया जा रहा हैं।

भारतीय फूलों की खेती का बाजार 2018 में 15700 करोड़ रुपये का था। 2019-24 के दौरान इसके 47200 करोड़ रुपये तक का हो जाने का अनुमान है। इस आयोजन में सैकड़ो कि संख्या में बकसोती के साथ डोभी प्रखंड के मुखिया जितेंद्र कुमार यादव, सरपंच कृष्ण प्रसाद,विनोद कुमार , सुनील कुमार, संटू कुमार, डॉ सतेंद्र प्रसाद , अशोक प्रसाद, अविनाश कुमार, मुन्नी प्रसाद,अर्जुन प्रसाद आदि सैकड़ो कि संख्या में ग्रामीण जनता उपस्थित रहे।

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किसानों को दिया गया नई तकनीक से पाैंधरोपण का प्रशिक्षण, भारत में विविध कृषि-जलवायु, विभिन्न तरह की मृदा और समृद्ध पादप विविधता के बावजूद वैश्विक फूलों की खेती का केवल 0.6% हिस्सा ही है। पढ़ें गया से देवभूमि समाचार के वरिष्ठ संवाददाता अर्जुन केशरी की रिपोर्ट-

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