हल्के में ना लें किसी भी संक्रमण को

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ओम प्रकाश उनियाल

हमारे देश के नागरिक हर बात को हल्के में लेते हैं। आदत-सी बना डाली है टालने की, लापरवाही बरतने की। फिर परिणाम ‘अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत’। कोरोना महामारी बीते दो साल में बहुत कुछ सिखा गयी है। जीवनशैली को पूरी तरह बदला करोना ने। हालांकि, खतरा अभी टला नहीं है। मगर हम बेफिक्र होकर लापरवाही बरतने लगे हैं।

इसके साथ ही एक और बीमारी लगभग 27 देशों में फैल चुकी है। ‘मंकीपॉक्स’ नाम से जानी जा रही है यह बीमारी। भारत में अभी तक यह बीमारी नहीं पहुंची है। लेकिन जिन देशों में इसका प्रसार हो रहा है वहां से आने वालों के माध्यम से यहां फैल सकती है। इसके अन्य लक्षणों के अलावा शरीर पर दाने उभरना है चेचक की भांति। जब भी यह बीमारी फैलती है तेजी से फैलती है।

आजकल वतावरण भी इतना दूषित हो चुका है कि कब कौन-सा वायरस हमला बोल दे अनुमान नहीं लग पाता। ऐसे में उनका त्वरित इलाज भी संभव नहीं हो पाता। कोरोना वायरस का भी यही हाल था। जिन देशों में यह संक्रमण फैला था वहां से आने वालों के कारण ही भारत में भी फैला था।

बेहतर यही होगा कि देशवासी किसी संक्रमण के प्रभाव को बिल्कुल भी हल्के में न लें। जीवन बहुमूल्य है। जरा-सी लापरवाही आपके और आपके परिवार को तबाह कर सकती है। संक्रमण हवा के माध्यम से भी फैलता है। संक्रमण के कीटाणु सांस के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं जिससे शरीर में विभिन्न प्रकार के लक्षण पैदा होने लगते हैं।

किसी भी संक्रमण का इलाज करवाने से पहले परीक्षण अवश्य कराएं। खुद ही अपना डॉक्टर न बनें। साथ ही मास्क का उपयोग जरूर करें जब भी घर से बाहर निकलें। अपने आसपास का वातावरण साफ रखें, स्वयं की सफाई का भी खास ध्यान रखें। सरकार स्वास्थ्य संबंधी जो नियम बनाती है उनका अनुपालन करें। ताकि, संक्रमण से काफी हद तक बचा जा सके।


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

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ओम प्रकाश उनियाल

लेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार

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कारगी ग्रांट, देहरादून (उत्तराखण्ड) | Mob : +91-9760204664

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देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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