
देहरादून के अंकित थपलियाल हत्याकांड में 12 साल बाद मुख्य आरोपी के मारे जाने से परिवार को न्याय मिलने का एहसास हुआ। बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए बुजुर्ग पिता ने सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी, लेकिन लंबे समय तक निराशा हाथ लगी। अब आरोपी के एनकाउंटर के बाद परिवार को मानसिक शांति मिली, हालांकि अन्य आरोपियों को सजा दिलाने की मांग जारी है।
- अंकित हत्याकांड में मुख्य आरोपी ढेर, परिवार को मिली राहत
- बेटे की हत्या के बाद बिखर गया परिवार, 12 साल बाद मिली शांति
- सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे पिता, अब एनकाउंटर के बाद मिला सुकून
- बेटे के हत्यारों को सजा दिलाने की मांग, परिवार की आंखों में आंसू
देहरादून: अंकित थपलियाल हत्याकांड में 12 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद परिवार को न्याय मिलने का एहसास हुआ है। वर्ष 2014 में नकरौंदा के बालावाला क्षेत्र में हुई इस दर्दनाक घटना ने पूरे परिवार को अंदर तक झकझोर दिया था। लूट की नीयत से घर में घुसे बदमाशों ने अंकित थपलियाल की बेरहमी से गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद परिवार भय और सदमे में इस कदर डूब गया कि माता-पिता को अपनी बेटियों के पास बंगलूरू, मुंबई और न्यूजीलैंड तक जाना पड़ा।
बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए अंकित के पिता, जो सहायक कृषि अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हैं, ने न्याय की हर संभव राह अपनाई। उन्होंने वर्ष 2016 में सुप्रीम कोर्ट तक अपील की, लेकिन वहां से मामला नैनीताल हाईकोर्ट भेजे जाने के निर्देश मिलने के बाद वे बेहद निराश हो गए। हताशा में उन्होंने केस से जुड़े दस्तावेज तक नष्ट कर दिए थे। इसके बावजूद उनके मन में न्याय की आस कहीं न कहीं जीवित रही।
हाल ही में मुख्य आरोपी अकरम के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की खबर मिलने पर परिवार की आंखों में राहत और दर्द दोनों के आंसू छलक पड़े। माता-पिता ने इसे बेटे के लिए न्याय का एक चरण बताया और कहा कि अब उनके दिल को कुछ शांति मिली है। हालांकि उनका मानना है कि बाकी पांच आरोपियों को भी सख्त सजा मिलनी चाहिए, तभी पूरी तरह न्याय मिलेगा।
अंकित की मां अंजनी ने भावुक होते हुए कहा कि जिस क्रूरता से उनके इकलौते बेटे की हत्या की गई, उसी तरह सभी दोषियों को कठोर सजा मिलनी चाहिए। घटना के बाद परिवार ने उस भयावह याद से दूर रहने के लिए अपने घर में बदलाव तक कर दिए, लेकिन वह दर्द आज भी उनके दिल में ताजा है।
स्थानीय लोगों ने भी अंकित की बहादुरी को याद करते हुए मांग की है कि क्षेत्र में उनके नाम पर एक स्मारक या गेट बनाया जाए। उनका कहना है कि अंकित ने अपने परिवार की रक्षा करते हुए अपनी जान गंवाई थी, जिसे हमेशा याद रखा जाना चाहिए। यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि न्याय की लंबी और कठिन लड़ाई का प्रतीक भी है, जिसमें वर्षों बाद सही-गलत का फैसला सामने आता है।




