
पुष्कर सिंह धामी ने सीएम हेल्पलाइन समीक्षा में 22 हजार से अधिक शिकायतें जबरन बंद होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बिना समाधान शिकायत बंद करने वाले अफसरों पर कड़ी कार्रवाई होगी। आंकड़ों में हेरफेर और लंबित मामलों में बढ़ोतरी ने प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- अफसरों की लापरवाही उजागर, शिकायतें बिना समाधान बंद
- सीएम की सख्ती: अब जबरन शिकायत बंद करने पर होगी कार्रवाई
- विभागों ने आंकड़ों से खेला, जनता की समस्याएं अनसुलझी
- लंबित शिकायतों में भारी उछाल, समीक्षा में सामने आई हकीकत
देहरादून: पुष्कर सिंह धामी ने सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा बैठक में अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। समीक्षा के दौरान सामने आया कि राज्य में कुल 1,19,077 शिकायतों में से 22,246 शिकायतें (करीब 18.68 प्रतिशत) बिना उचित समाधान के जबरन बंद कर दी गईं। इस खुलासे के बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जनता की शिकायतों के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिलाधिकारी, विभागाध्यक्ष या संबंधित सचिव की अनुमति के बिना किसी भी स्तर पर शिकायत को बंद नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाइन केवल एक नंबर नहीं, बल्कि जनता के विश्वास का माध्यम है, इसलिए हर शिकायत का निस्तारण शिकायतकर्ता की संतुष्टि तक किया जाना जरूरी है। समीक्षा में यह भी सामने आया कि कई विभाग अपनी जवाबदेही से बचने के लिए शिकायतों की श्रेणी बदल रहे हैं या उन्हें तकनीकी कारणों में उलझाकर बंद कर दे रहे हैं।
उदाहरण के तौर पर जल संस्थान में पानी न आने की सैकड़ों शिकायतें बंद कर दी गईं, जबकि बिजली बिल और खराब मीटर जैसी समस्याओं को भी सही तरीके से नहीं सुलझाया गया। सबसे चौंकाने वाला मामला जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक का सामने आया, जिनके पास 2,074 शिकायतें थीं, जिनमें से 2,043 शिकायतों को बिना ठोस समाधान के बंद कर दिया गया। इसके अलावा पर्यटन विभाग में भी शिकायतों के निस्तारण की दर बेहद कम पाई गई।
प्रदेश में 6,287 शिकायतें ऐसी हैं जो 180 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं। इनमें राजस्व, वन और लोक निर्माण विभाग शीर्ष पर हैं। आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में लंबित शिकायतों में 107 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि प्रक्रिया में लंबित मामलों में 2290 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों की सराहना भी की। उन्होंने कुछ अधिकारियों से फोन पर बात कर उनके कार्य की प्रशंसा की और अन्य अधिकारियों को उनसे सीख लेने की सलाह दी।
कुल मिलाकर, इस समीक्षा ने प्रशासनिक तंत्र की कई खामियों को उजागर किया है। मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभागीय स्तर पर सुधार कितनी तेजी से लागू होते हैं और जनता की शिकायतों का समाधान कितनी प्रभावी ढंग से किया जाता है।





