कविता : सच सच कह दिया, जाग कर चांदनी रातों में खत जो लिखे। ख्याल मन में जो...
साहित्य लहर
कविता : उजियारा, हम उसी वक्त से अब तक रहे समाये यारों की यह बस्ती आज खौफ...
कविता : फर्क, भर आते हैं नैन! लुट जो गये हैं चैन दुश्मन देश की दुल्हा वाली.....
होठों से वो गीत छूट ही गया, मैं भी चल पड़ा मिलने! होंठों को सुना न आंखें...
कविता : आया क्रिसमस, लाया खुशियां अपार, चर्च पर रंग बिरंगी रोशनी के बीच, जगमगा रहे हैं...
कविता : उनकी यादों में, अपनी आकृति में जंजीरों में जकड़े समय की गाथा सुनाते हमें तोड़ना...
कविता : रात की बात…! रौशनी रहते न देख पाएगा, कदम डगमगाएगा और तू, लड़खड़ा कर गिर जाएगा, जबकि...
कविता : पूस की रात, कोहरे की चादर से, देखो ढकी तराई है, सूरज की किरणें भी...
कविता : याद आता है, हमारे पास अब न वक्त है मां-बाप की खातिर लिया जो वक्त...
कविता : नया साल, इस दिन घर के पास जिसे भी देखना उसके पास जाना शायद वह...













