श्रीकांत त्यागी मामले में बढ़ा विवाद, जानें धारायें

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नोएडा। नोएडा की ग्रैंड ओमैक्स सोसाइटी में दबंगई करने वाले गालीबाज नेता श्रीकांत त्यागी के खिलाफ अब सख्त एक्शन लिया जा रहा है. पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए 8 टीमें गठित की हैं. साथ ही उसकी गिरफ्तारी पर 25000 रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है. खुद को भाजपा नेता बताने वाले श्रीकांत के खिलाफ नोएडा पुलिस ने आईपीसी की कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है. आइए जानते हैं कि त्यागी के खिलाफ लगी हैं कौन-कौन सी धाराएं और दोषी पाए जाने पर उसे मिलेगी कितना सजा?

महिला के साथ बदसलूकी करने और उस पर हाथ उठाने वाले गालीबाज नेता श्रीकांत त्यागी का वीडियो वायरल हो जाने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया. शिकायतें होने के बावजूद त्यागी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई ना होने से सवाल उठने लगे. जब विवाद बढ़ गया और नोएडा के सांसद महेश शर्मा ने भी पुलिस पर निशाना साधा, तब जाकर पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की.

पुलिस ने शुक्रवार को श्रीकांत त्यागी के खिलाफ नोएडा के थाना फेस 2 में मुकदमा अपराध संख्या- 0329 दर्ज किया था. जिसमें श्रीकांत त्यागी के खिलाफ आईपीसी की धारा 354 का इस्तेमाल किया गया है. जबकि नई एफआईआर में उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 419, 420 और 482 भी लगाई गई है. क्योंकि उसने अपनी कार पर यूपी सरकार का स्टिकर भी लगा रखा था.

क्या है आईपीसी की धारा 354
भारतीय दंड संहिता की धारा 354 का इस्तेमाल ऐसे मामलों में किया जाता है. जहां स्त्री की मर्यादा और मान सम्मान को क्षति पहुंचाने के लिए उस पर हमला किया गया हो या उसके साथ गलत मंशा के साथ जोर जबरदस्ती की गई हो.

सजा का प्रावधान
भारतीय दंड संहिता के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति किसी महिला की मर्यादा को भंग करने के लिए उस पर हमला या जोर जबरदस्ती करता है, तो उस पर आईपीसी की धारा 354 लगाई जाती है. जिसके तहत आरोपी पर दोष सिद्ध हो जाने पर दो साल तक की कैद या जुर्माना या फिर दोनों की सजा हो सकती है.

आईपीसी की धारा 323
भारतीय दंड संहिता की धारा 323 के अनुसार, जो भी व्यक्ति (धारा 334 में दिए गए मामलों के सिवा) जानबूझ कर किसी को स्वेच्छा से चोट पहुंचाता है, उसे इस कृत्य के लिए अपराधी माना जाएगा.

सजा का प्रावधान
ऐसा करने वाले को किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा. जिसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है. या उस पर एक हजार रुपये तक का जुर्माना किया जाएगा. या फिर उसे दोनों ही प्रकार से दंडित किया जा सकता है. यह एक जमानती और गैर-संज्ञेय अपराध है. जो किसी भी न्यायाधीश द्वारा विचारणीय है.

आईपीसी की धारा 419
भारतीय दंड संहिता की धारा 419 के अनुसार, जो भी कोई प्रतिरूपण द्वारा छल करेगा, तो इस कृत्य के लिए अपराधी माना जाएगा.

सजा का प्रावधान
ऐसा करने वाले को किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा. जिसे तीन वर्ष तक के लिए बढ़ाया जा सकता है. या उस पर आर्थिक दण्ड लगाया जाएगा. या फिर दोषी को दोनों प्रकार से ही दण्डित किया जाएगा. यह एक जमानती और संज्ञेय अपराध है. ऐसे मामले किसी भी मेजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है.

आईपीसी की धारा 420
श्रीकांत त्यागी को आईपीसी की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा करने का आरोपी बनाया गया है. अगर कोई भी किसी शख्स को धोखा दे, बेईमानी से किसी भी व्यक्ति को कोई भी संपत्ति दे या ले. या किसी बहुमूल्य वस्तु या उसके एक हिस्से को धोखे से खरीदे-बेचे या उपयोग करे या किसी भी हस्ताक्षरित या मुहरबंद दस्तावेज़ में परिवर्तन करे, या उसे बनाए या उसे नष्ट करे या ऐसा करने के लिए किसी को प्रेरित करे तो वह भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के अनुसार दोषी माना जाता है.

सजा का प्रावधान
सजा का प्रावधानऐसे में दोषी पाए जाने पर किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जा सकती है, जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है. साथ ही दोषी पर आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है. या फिर दोनों भी. यह एक गैर-जमानती संज्ञेय अपराध है, जिसे किसी भी न्यायाधीश द्वारा सुना जा सकता है. यह अपराध न्यायालय की अनुमति से पीड़ित व्यक्ति द्वारा समझौता करने योग्य है.

आईपीसी की धारा 482
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 482 के अनुसार, जो भी कोई किसी ग़लत सम्पत्ति मुहर का उपयोग करता है, जब तक कि वह यह साबित न कर दे कि उसने ऐसा कार्य कपट करने के आशय से नहीं किया है, तो ऐसा करने वाला वह शख्स अपराधी माना जाएगा.

सजा का प्रावधान
ऐसा करने वाले को दोषी पाए जाने पर किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा. जिसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है. या उस पर आर्थिक जुर्माना किया जाएगा. या फिर उसे दोनों ही तरह से दण्डित किया जाएगा. यह एक जमानती और गैर-संज्ञेय अपराध है. जो किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है.

क्या होता है गैंगस्टर
भारत में गिरोह बनाकर अपराध करने वाले बदमाशों के खिलाफ सरकार ने 1986 में गैंगस्टर एक्ट बनाया और लागू किया था. गैंगस्टर अधिनियम 1986 के मुताबिक, एक या एक से अधिक व्यक्तियों का समूह जो अपराध के जरिए अनुचित लाभ अर्जित करता है, या इस मकसद से एक्ट में उल्लिखित अपराध करता है तो वह गैंगस्टर कहा जाता है.

चाहे वह किसी भी तरह का अपराध हो. सीधे कहें तो गैंगस्टर एक अपराधी है, जो एक गिरोह का सदस्य है. ज्यादातर गिरोह संगठित अपराध का हिस्सा माने जाते हैं. गैंगस्टर शब्द भीड़ और प्रत्यय -स्टर से लिया गया है. इनके गैंग एक व्यक्तिगत अपराधी की तुलना में बहुत बड़े और अधिक जटिल अपराध करते हैं.

पुलिस ऐसे घोषित करती है गैंगस्टर
हत्या, लूट, डकैती, रंगदारी वसूलना आदि जैसे संगीन अपराध में शामिल एक या एक से अधिक व्यक्ति जो अपनी जीविका अर्जित करने के लिए अपराध करते हैं. जिनका जीविका कमाने का साधन ही अपराध हो और वे अपराध करके संपत्ति अर्जित करते हैं. और वे संपत्ति अर्जित करने के मकसद से ही अपराध करते हों तो वे गैंगस्टर की श्रेणी में आ जाते हैं.

गैंगस्टर की कार्रवाई के लिए एक या एक से अधिक मुकदमें हो सकते हैं. ऐसा अपराधी जो गैंग के रूप में काम करता है और अपने साथी बदल बदलकर अलग-अलग आपराधिक घटनाओं को अंजाम देता है. ऐसे व्यक्ति को गैंगस्टर के तौर पर नामित करने के लिए संबंधित थाने का प्रभारी यानी एसएचओ एक चार्ट बनाता है, जिसे गैंग चार्ट कहते हैं. उस चार्ट में उस व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह जो अपराध कारित करता है, उनके नाम और अपराध के विवरण दर्ज किए जाते हैं. उसमें गिरोह को संचालित करने वाले अपराधी को गैंग लीडर के तौर पर दर्शाया जाता है.

इसमें सबसे अहम बात ये है कि उन मामलों में आरोपी के खिलाफ चार्जशीट लगा होना ज़रूरी है, जिसे न्यायलय में दाखिल किया गया हो. एसएचओ इस चार्ट को अपने वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करता है. यह चार्ट सीओ, एसपी के पास होते हुए जिले के डीएम तक पहुंचता है. डीएम उस गैंग का चार्ट का अध्यन और निरीक्षण करते हैं, और अगर उन्हें लगता है कि आरोपी गैंगस्टर एक्ट के तहत आ रहा है, तो वे गैंग चार्ट को मंजूरी दे देते हैं. इस तरह से आरोपी को गैंगस्टर घोषित किया जाता है.

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