
यह लेख पत्रकार एवं शिक्षक स्व. चन्द्रशेखर भट्ट के व्यक्तित्व, कृतित्व और समाज सेवा को समर्पित श्रद्धांजलि है। लेख में उनकी निष्पक्ष पत्रकारिता, जनहित के प्रति समर्पण, मिशनरी सोच और मानवीय मूल्यों पर आधारित जीवन का वर्णन किया गया है। उनके जन्मदिन पर लेखक ने उन्हें लोकतंत्र का सजग प्रहरी, सच्चा कर्मयोगी और मानवता का मसीहा बताते हुए भावपूर्ण नमन किया है।
- मिशनरी पत्रकारिता की मिसाल थे स्व. चन्द्रशेखर भट्ट
- कलम का सौदा नहीं, सत्य का साथ: स्व. भट्ट का प्रेरक जीवन
- शिक्षक, पत्रकार और समाजसेवी: एक बहुआयामी व्यक्तित्व की गाथा
- जनसरोकारों की आवाज और पत्रकारिता जगत की महान हस्ती
सुनील कुमार माथुर
जीवन जीना भी एक कला है और जिसने इस कला को सीख लिया, समझो उसने जीवन को सही ढंग से जीना सीख लिया है। अब उसे उसकी ऊंचाइयों तक पहुंचाने से कोई नहीं रोक सकता, क्योंकि वह यह बात सीख गया है कि आगे बढ़ना है तो हर परिस्थिति में हमें समान बने रहना है और अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए कुछ नया करना होगा। चूंकि जीवन में उतार-चढ़ाव आते ही रहते हैं, इसलिए व्यक्ति को कभी भी घबराना नहीं चाहिए और सदैव सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते रहना चाहिए। संकट आता है तो वह हमेशा हमें कुछ न कुछ नई बात सिखा जाता है और जो व्यक्ति हिम्मत रखकर संकट की घड़ी से एक बार निकल जाता है, वह सदा के लिए आगे बढ़ जाता है। पत्रकार स्व. चन्द्रशेखर भट्ट का मानना था कि जीवन में अर्जित किए गए ज्ञान का उपयोग परिवार, समाज व राष्ट्र के उत्थान में करना चाहिए।
वे सच्चे अर्थों में लोकतंत्र के सजग प्रहरी थे। वे जनता-जनार्दन की आवाज थे और जनता की समस्याओं को प्रशासन और सरकार के समक्ष प्रस्तुत करते थे। जब तक उनका समाधान नहीं हो जाता था, तब तक वे चैन की सांस नहीं लेते थे। उनका कहना था कि एक स्वतंत्र मीडिया ही लोकतंत्र को सशक्त बना सकता है। उन्होंने मिशनरी पत्रकारिता के जरिए जो अलख जगाई, वह किसी से छिपी नहीं है। उनका जीवन संघर्ष और सिद्धांतों की मिसाल रहा। उनकी लेखनी ने न केवल पत्रकारिता की दिशा बदली, अपितु लोकतांत्रिक मूल्यों को भी मजबूती प्रदान की। ऐसा ही कर दिखाया हमारे पत्रकार साथी स्व. चन्द्रशेखर भट्ट ने।
कभी भी अपनी कलम का सौदा नहीं किया
शिक्षक व पत्रकार स्व. चन्द्रशेखर भट्ट ने अपने जीवनकाल में कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने कठिन परिस्थितियों का भी दृढ़ता के साथ सामना कर युवाओं के समक्ष एक आदर्श मिसाल रखी। शिक्षक और पत्रकार दोनों का मिशन राष्ट्र के नव-निर्माण का होता है। इसी ध्येय वाक्य को लेकर उन्होंने एक आदर्श शिक्षक के रूप में ख्याति अर्जित की। वहीं दूसरी ओर पत्रकारिता का कर्म भी उन्होंने बखूबी निभाया। उन्होंने कभी भी अपनी कलम का सौदा नहीं किया, अपितु उसका उपयोग दबंगता के साथ निष्पक्ष और निर्भीक होकर राष्ट्र के विकास व उत्थान के लिए किया।
वे एक निर्भीक पत्रकार थे
वे एक आदर्श शिक्षक थे और पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ बच्चों को पढ़ाया। उन्होंने विद्यार्थियों को न केवल किताबी ज्ञान दिया, बल्कि व्यवहारिक ज्ञान देकर उन्हें आदर्श संस्कार भी दिए। वे शिक्षक होने के साथ-साथ एक आदर्श मार्गदर्शक व पथप्रदर्शक भी थे। उनकी कथनी व करनी में कोई अंतर नहीं था। शैक्षणिक कार्य के अलावा उन्होंने पत्रकारिता भी की। वे एक आदर्श, निष्पक्ष व निर्भीक पत्रकार थे। उनकी लेखनी में दम था। वे सदैव सत्य लिखा करते थे। यही वजह है कि उनके लिखे लेखों व संपादकीयों को पाठक गौर से पढ़ा करते थे, क्योंकि वे सटीक व सारगर्भित आलेख लिखा करते थे। यही कारण था कि बुद्धिजीवी विद्यार्थी उनके विचारों को अपने उत्तरों में आवश्यकता के अनुसार उदाहरण स्वरूप उद्धृत करते थे।
सदैव रचनाकारों का मनोबल बढ़ाया
स्व. चन्द्रशेखर भट्ट ने जनसमस्याओं को उजागर करने में भी अपनी महती भूमिका निभाई। यही वजह है कि देवभूमि समाचार पत्र ने पाठकों, प्रशासन व सरकार के बीच सदैव एक रचनात्मक पुल की भूमिका निभाई। स्व. चन्द्रशेखर भट्ट ने सदैव नए रचनाकारों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया और हर रचनाकार को प्रोत्साहन दिया। उन्होंने हर रचनाकार की कलम को धार दी और अपने पत्र में प्रमुखता के साथ स्थान देकर उनका मनोबल बढ़ाया। उन्होंने काम को ही अपनी पूजा माना।
लेखन उनके लिए मां सरस्वती की आराधना था। वे कहते थे कि सदैव रचनात्मक लेखन करना चाहिए, जिससे समाज व राष्ट्र को एक नई दशा और दिशा मिल सके। इतना ही नहीं, लेखन के माध्यम से हम समाज में सकारात्मक परिवर्तन भी ला सकते हैं। राष्ट्र के विकास और उत्थान के लिए हिम्मत से कार्य करना चाहिए। सहयोग सभी कर सकते हैं, लेकिन साहस आपको स्वयं ही दिखाना होगा। जीवन की सार्थकता तभी है जब आपके कार्यों से समाज में सकारात्मकता आए।
मिशनरी पत्रकारिता कर एक मिसाल कायम की
स्व. चन्द्रशेखर भट्ट पीत पत्रकारिता से सदा दूर रहे। उनकी पत्रकारिता मिशनरी पत्रकारिता थी। वे स्वयं अन्याय, अत्याचार, भ्रष्टाचार, तानाशाही व जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने के लिए अग्रिम पंक्ति में हर वक्त खड़े रहते थे। यही वजह है कि हर कोई देवभूमि समाचार पत्र का दीवाना था और आज भी है। स्व. चन्द्रशेखर भट्ट ने मिशनरी पत्रकारिता कर समाज के सामने एक आदर्श व अनूठी मिसाल कायम की।
कभी भी किसी के समक्ष झुके नहीं, टूटे नहीं
उनके समय में आज की तरह इतनी सारी सुविधाएं मीडिया के पास नहीं थीं, फिर भी छोटे व मझोले समाचार पत्रों के जरिए समाज सेवा का जज्बा उनमें कूट-कूट कर भरा था। अपने जीवनकाल में उन्होंने अनेक कष्ट झेले, लेकिन अपने चेहरे पर कभी भी उस पीड़ा या दुःख को झलकने नहीं दिया। आर्थिक दृष्टि से कमजोर होने के बाद भी वे कभी किसी के आगे झुके नहीं, टूटे नहीं और बिके नहीं, क्योंकि समाज व राष्ट्र की सेवा करना ही उनका मूल उद्देश्य था। यही वजह है कि आज देवभूमि समाचार पत्र प्रतिष्ठित समाचार पत्रों की श्रेणी में गिना जाता है।
सदा संघर्षशील रहे
वे अपनी कार्यशैली के लिए जाने जाते थे। वे छोटे और मझोले समाचार पत्रों के हितों के लिए सदैव संघर्षशील रहे और पत्रकारों के हितों के लिए अग्रणी पंक्ति में खड़े रहे। उन्होंने अपने जीवनकाल में पत्रकारिता को एक नया आयाम दिया। ऊर्जावान होने के साथ-साथ वे दबंग छवि वाले पत्रकार थे। आठ जून को उनके जन्मदिन पर हम सभी रचनाकार उन्हें नमन करते हैं और यही प्रार्थना करते हैं कि वे परलोक में जहां भी हों, अपना आशीर्वाद हम पर बनाए रखें तथा हमें सदैव मार्गदर्शन देते रहें, ताकि सकारात्मक सोच के साथ हम अपने मिशन में आगे बढ़ते रहें। उनका जीवन एक खुली किताब की तरह था। वे सादा जीवन और उच्च विचारों के धनी थे। देश की गंदी राजनीति से सदा दूर रहे।
पत्रकारिता जगत की महान हस्ती थे
वे शिक्षकों व पत्रकारों के मित्र, गुरु, मार्गदर्शक, सलाहकार व मददगार थे। स्व. चन्द्रशेखर भट्ट ने अपने हौसले व हुनर से शिक्षा व पत्रकारिता जगत की महान हस्ती बनकर इन क्षेत्रों का मान बढ़ाया। साथ ही युवाओं को प्रेरित करते हुए नई राह दिखाई और सफलता की सीढ़ियां चढ़ने में कदम-दर-कदम मदद की। स्व. भट्ट का जीवन स्वच्छ व निर्मल था। मानो गंगा के समान पवित्र था। वाणी में हरदम राम-नाम और हृदय में सेवा का भाव था। परिवार रूपी वटवृक्ष को उन्होंने संस्कारों के जल से सींचा था। उनका जीवन हमेशा सभी को प्रेरित करता रहा। उन्होंने सेवा और सादगी के आदर्श को अपने जीवन में साकार कर दिखाया।
वे सरल स्वभाव के धनी थे। सादा जीवन और उच्च विचारों को अपनाकर उन्होंने सादगी की मिसाल कायम की। वे एक तरह से आध्यात्मिक गुरु थे। यही वजह है कि उनके अमिट सेवा कार्य युगों-युगों तक उजियारा करेंगे। 15 अगस्त 2016 का दिन वह कुसमय था जब यह महान विभूति इस नश्वर संसार को छोड़कर परलोक सिधार गई। अपने समस्त सेवा भाव, भक्ति, अध्यात्म, मिलनसार एवं मददगार व्यक्तित्व की छाप हमारे दिलों पर छोड़कर वे सदा-सदा के लिए परमपिता परमेश्वर की दिव्य ज्योति में विलीन हो गए।
नियति ने असमय ही आपको हमसे छीन लिया। आपकी सहृदयता, धर्मपरायणता एवं चारित्रिक विशेषताएं चिरस्मरणीय एवं प्रेरणादायी हैं। आपके आदर्श सभी के लिए एक प्रकाश स्तंभ की तरह हैं। आप ही हमारी प्रतिष्ठा, सम्मान एवं ताकत हैं। हमें हर पल यही अहसास होता है कि आप हमारे साथ हैं। आपकी यादों की अमूल्य धरोहर हमें जिंदगी की हर जंग जीतने की ताकत और प्रेरणा देती है। जब भी जिंदगी में खुशियों के अवसर आते हैं, आंखें भर आती हैं और आपकी याद आती है।
हमारे प्रेरणा स्रोत थे
स्व. भट्ट हमारे प्रेरणा स्रोत रहे हैं। वे स्वयं में एक आंदोलन थे। वे एक सच्चे कर्मयोगी थे। शिक्षा, पत्रकारिता व संस्कारों के साथ साहित्य में उनकी गहरी रुचि थी। वे अत्यंत सरल स्वभाव, धार्मिक प्रवृत्ति तथा सिद्धांतों के प्रति समर्पित व्यक्ति थे। दृढ़ मनोबल व कर्मठ व्यक्तित्व ही उनकी स्थायी पहचान है। वे संपूर्ण मानव जाति के संरक्षक, समाजसेवी, निर्भीक, विचारवान तथा सत्य एवं अहिंसा के प्रबल प्रहरी थे। जाति, धर्म, ऊंच-नीच और भेदभाव से ऊपर उठकर उन्होंने समाज को नैतिकता के उच्च विचार प्रदान किए। अपने विवेक और नैतिक बल से इंसान और इंसानियत को संवारा-सजाया। इंसानियत को समर्पित इस महान विभूति की क्षतिपूर्ति असंभव है। बिरले ही लोग होते हैं जो अपनी यादों को संसार में छोड़ जाते हैं। उनका जीवन जनसरोकार की पत्रकारिता के लिए समर्पित रहा।
सच्चे कर्मयोगी थे
वे एक सच्चे कर्मयोगी, दूरदर्शी, परोपकारी और उच्च विचारों के शिक्षक व पत्रकार थे। आपकी विनम्रता, सूझ-बूझ, करुणा एवं मार्गदर्शन हमारी प्रेरणा के स्रोत रहेंगे। आपकी काम के प्रति सच्ची निष्ठा, दृढ़ संकल्प, समाज के प्रति समर्पण और प्रगतिशील विचारों के प्रति निस्वार्थ भक्ति हमेशा सुनहरे अक्षरों में याद की जाएगी। आपकी अनुपस्थिति का गहरा घाव कभी नहीं भर पाएगा। उनका मुस्कुराता हुआ चेहरा, दूरदर्शितापूर्ण सोच, अथक प्रयास, निस्वार्थ दृष्टिकोण और मानवीय मूल्य हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे। मानव समाज सदा आपका आभारी रहेगा।
मानव सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं
स्व. चन्द्रशेखर भट्ट उन विरले व्यक्तित्वों में से थे, जिनके जीवन का हर क्षण सेवा, करुणा और मानवता को समर्पित रहा। उनके वात्सल्य, त्याग और समाज कल्याण की चमकदार मिसाल देवभूमि समाचार पत्र है। उनका संपूर्ण जीवन इस सत्य का जीवंत उदाहरण है। वे कहते थे कि मानव सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।
शांति के दूत
संक्षेप में वे एक कर्मयोगी, क्रांति के पुरोधा, शांति के दूत, पथप्रदर्शक और संरक्षक थे। आप एक ज्योति-पुंज के रूप में सदैव हमारे पथप्रदर्शक बने रहेंगे। आपकी विद्वता, विराट व्यक्तित्व, मृदु स्वभाव तथा प्राणी मात्र के लिए असीम स्नेह हमारे लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। अपने बहुमुखी व्यक्तित्व से पारिवारिक, सामाजिक और आध्यात्मिक क्षेत्रों में जो अमिट छाप आपने छोड़ी है, उसका कोई सानी नहीं है। आपका जीवन-दर्शन हमारी सभी आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहे। आपके जन्मदिन पर आपको बारम्बार नमन करते हैं। आपका आशीर्वाद सदैव हम पर बना रहे। आपके जन्मदिन पर हम नतमस्तक हैं, कृतज्ञ हैं और यह संकल्प लेते हैं कि आपके आदर्श, शिक्षा और करुणा को हम निरंतर आत्मसात करते रहेंगे।
सुनील कुमार माथुर
सदस्य, अणुव्रत लेखक मंच
(स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार) 33, वर्धमान नगर, शोभावतों की ढाणी, खेमे का कुआं, पाल रोड, जोधपुर, राजस्थान







