
यह आलेख जीवन में ईमानदारी, संतोष, विश्वास और संस्कारों के महत्व को रेखांकित करता है। इसमें बताया गया है कि धन से अधिक मूल्यवान आशीर्वाद, नैतिकता और सही मार्ग पर चलना है। साथ ही बच्चों, परिवार और समाज में विश्वास और संवाद की भूमिका को भी समझाया गया है।
- आशीर्वाद, विश्वास और जीवन की सच्चाई
- धन नहीं, संस्कार ही असली पूंजी
- जीवन में संतोष और विश्वास का महत्व
- संस्कार, संयम और सफलता का मार्ग
सुनील कुमार माथुर
आज देश भर में क्रांतिकारी बदलाव के नाम पर अपराध बढ़ते ही जा रहे हैं और जनता व बेरोजगार युवाओं में रातों-रात करोड़पति बनने की दौड़-सी मच गई है। पैसा किसे प्यारा नहीं लगता। धन ही एक ऐसा माध्यम है जिससे हम अपने सपने आसानी से पूरे कर सकते हैं, लेकिन गलत ढंग से कमाया गया पैसा कभी भी लाभदायक सिद्ध नहीं होता। वह अपने साथ अनेक बुरे कर्म व बीमारियाँ लेकर आता है, जो हमारे विनाश का कारण बनता है। इसलिए अनैतिक तरीके से कभी भी धन कमाने का प्रयास न करें। हमारे बड़े-बुजुर्गों का कहना है कि सही समय पर गलत जगह से निकल जाना भी एक आशीर्वाद ही है। अतः हमेशा मेहनत कर धन कमाएँ।
जीवन में हर वक्त एक-सी परिस्थिति नहीं होती। हर क्षण परिस्थिति बदलती रहती है, लेकिन हम कभी इस ओर ध्यान नहीं देते। जीवन में कभी खुशी तो कभी ग़म चलता ही रहता है। खुशी के क्षणों में हम इतने खुश हो जाते हैं कि दूसरी सारी बातों को भूल जाते हैं और जमकर खुशियों का आनंद उठाते हैं। लेकिन जब ग़म या दुःख आता है, तो हम हताश व निराश हो जाते हैं और कभी-कभी ईश्वर को भी कोसने लगते हैं। हम परमात्मा को बुरा-भला कहकर अपने मन को जरूर कुछ देर के लिए हल्का कर लेते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि खुशी के क्षणों में अधिक हँसे नहीं और ग़म में अधिक रोए नहीं, अपितु हर परिस्थिति में समान रूप से रहना चाहिए।
देना ही है तो आशीर्वाद दीजिए
बड़े-बुजुर्गों को चाहिए कि वे बच्चों को आदर्श संस्कारों के साथ हर वक्त अपना आशीर्वाद दें। वहीं बच्चों को भी चाहिए कि वे बड़े-बुजुर्गों का आदर, मान-सम्मान करें, उनकी आज्ञाओं का समय पर पालन करें। उनके पास बैठें और उनके जीवन के अनुभवों को सुनें तथा उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करें। बड़े-बुजुर्गों को भी चाहिए कि वे यदि अपने बच्चों को धन-दौलत नहीं दे सकते, तो कोई बात नहीं, लेकिन आशीर्वाद तो अवश्य दे सकते हैं।
सवालों की बारिश
बच्चों के साथ पूछताछ के नाम पर सवालों की बारिश न करें। बच्चों से प्रेम और स्नेह के साथ बातचीत करते हुए पूछताछ कीजिए, ताकि वह भयभीत न हो। जो भी पूछना हो, वह एक-एक करके पूछें। सवालों की बौछार करने से बच्चों में तनाव पैदा हो जाता है और वह या तो गलत कदम उठा लेता है या झूठ का सहारा लेता है।
विश्वास की दीवार
विश्वास की दीवार इतनी मजबूत होनी चाहिए कि उसे शंका भी न तोड़ सके। वर्तमान समय में किसी का विश्वास हासिल करना बहुत बड़ी बात है। विश्वास ही वह जरिया है जो पराये को भी अपना बना देता है। इसलिए विश्वास को सदैव बनाए रखें।
चुनौतियाँ
कहते हैं कि लक्ष्मी कभी अकेली नहीं आती, वह अपने साथ कई चुनौतियाँ भी लाती है। इसलिए धन-दौलत पाकर कभी घमंड नहीं करना चाहिए। ईमानदारी से कार्य करें और जितना मिले, उसमें संतोष रखें। संतोष से बड़ा कोई धन नहीं है।
कभी नहीं भूल सकता
कहते हैं कि मधुमक्खी शहद बनाना भूल सकती है, लेकिन एक कलमकार अपनी सकारात्मक व रचनात्मक लेखनी चलाना कभी नहीं भूल सकता। सच्चा कलमकार वही है जो समाज को उसका आईना दिखाता है। वह सत्य को उजागर करता है और समाज उत्थान के लिए सजग प्रहरी की तरह कार्य करता है।









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