
यह आलेख मौन और मुस्कान को जीवन के दो महत्वपूर्ण साधनों के रूप में प्रस्तुत करता है, जो कई समस्याओं का समाधान बन सकते हैं। लेखक समाज में बढ़ती नकारात्मकता और विडंबनाओं पर प्रश्न उठाते हुए आत्म-सुधार और संयम की आवश्यकता पर बल देता है।
- मौन और मुस्कान: जीवन के सरल उपाय
- मुस्कान से समाधान, मौन से संतुलन
- समाज की विडंबनाओं पर एक विचार
- बदलाव खुद से शुरू होता है
सुनील कुमार माथुर
हमारे बड़े बुजुर्गों का कहना है कि मौन और मुस्कान दो शक्तिशाली हथियार हैं। मुस्कान से कई समस्याओं का हल किया जा सकता है और “मौन” रहकर कई समस्याओं को दूर रखा जा सकता है। उनके कथन में सच्चाई है, जिसे हम इंकार नहीं कर सकते। वास्तव में जहाँ प्रेम और स्नेह है और मधुर मुस्कान है, वहाँ कोई समस्या हो ही नहीं सकती है, क्योंकि जहाँ मधुर मुस्कुराहट है, वहीं हर समस्या का एक चुटकी में समाधान है। ठीक इसी प्रकार हम मौन रहकर समस्याओं के आने से पहले ही उसका समाधान ढूंढ कर रखते हैं, जिससे समस्या उत्पन्न भी नहीं हो पाती है।
इस नश्वर संसार में जिसने भी संसार को बदलने का प्रयास किया, वह खुद हार गया और जिसने भी अपने आपको बदल लिया, वह जीत गया। क्योंकि हर व्यक्ति को समय और परिस्थितियों के अनुसार बदलना ही पड़ता है और उसी के अनुसार अपने को अपडेट करना पड़ता है। लेकिन आज हम समाज में देख रहे हैं कि समूचा विश्व एक-दूसरे को पराजित करने पर तुला हुआ है। कुछ सिरफिरे लोगों की वजह से हम अहंकार में जी रहे हैं और सभी को परेशानी में डाल रहे हैं, जो उचित नहीं है।
आज विद्वानों, शिक्षाविदों, ज्ञानियों, बुद्धिजीवियों को कुछ लोग ईर्ष्या वश गणेश गोबर, मूर्ख, हेकड़ीबाज और न जाने क्या-क्या कह रहे हैं। दूसरी ओर हम देख रहे हैं कि मक्खीचूस, कंजूस व्यक्ति का नाम लखपति है, भ्रष्टाचारी को समाजसेवी, खरी-खरी सुनाने वाले को बेशर्म, धर्मपरायण व्यक्ति को ढोंगी व पाखंडी कहा जा रहा है। बेशर्म लोगों की सराहना व चापलूसी की जा रही है। मेहनतकश व ईमानदार व्यक्ति को मूर्ख कहा जा रहा है। यह कैसी विडंबना है?
लोग सत्य को जानते हुए भी कहने से कतराते हैं। न जाने हम और कितने गिरने वाले हैं। बस किसी पर कीचड़ उछालने से पहले अपने ऊपर लगे दाग व छींटों को देखने की जरूरत है। अर्थात सभी सब्र से जीना चाहते हैं, लेकिन सब्र कोई भी नहीं रखना चाहता है।
सुनील कुमार माथुर
सदस्य अणुव्रत लेखक मंच एवं
स्वतंत्र लेखक व पत्रकार
33 वर्धमान नगर, शोभावतों की ढाणी, खेमे का कुआं, पाल रोड, जोधपुर, राजस्थान









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