नारी और घर गृहस्थी की गाड़ी

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सुनील कुमार माथुर

33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)

नारी घर गृहस्थी की गाड़ी है जो अपने घर को पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ चलाती है फिर भी वह उफ तक नहीं करती है । वह बच्चों में आदर्श संस्कारों का बोध कराती है ।‌ उन्हें आदर्श जीवन जीने की कला सिखाती है ।‌ नारी ज्ञानवान , चरित्रवान व होनहार होती है । इतना ही नहीं वह विभिन्न विधाओं में निपूर्ण होती हैं । फिर भला नारी पर जुल्म व अत्याचार क्यों ? वह तो गुणों की खान हैं । उसके बारे में जितना भी लिखा जाये वह कम है ।
नारी पर लिखने का अर्थ सूर्य को दीपक ( रोशनी ) दिखाना ही कहा जा सकता हैं । चूंकि वह तो ममता की मूर्त है ।‌ प्रेरणा पुंज है । दया की सागर हैं । नाना प्रकार के दु:ख , चिंताएं , पीडा मन के भीतर ही भीतर सहन करती रहती है लेकिन फिर भी कभी उफ तक नहीं करती । चूंकि वह दया , करूणा , ममता व वात्सल्य की प्रतिमूर्ति है । इसके बावजूद उस पर आए दिन अत्याचार व जुल्म हो रहें है जो शर्म की बात हैं ।
आज की नारी हर क्षेत्र में पुरुषो के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रही है । महिलाएं सामाजिक व राजनैतिक और आर्थिक क्षेत्रों में उच्च पदों पर बहुत अच्छे ढंग से कार्य कर रही हैं । समाज के विकास में उत्कृष योगदान दे रही है । महिलाएं राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री , लोकसभि अध्यक्ष जैसे महत्व पूर्ण पदों पर कार्य करते हुए अग्रणी भूमिका निभा रही है ।
महिलाओं में योग्यता , धैर्य , आत्मविश्वास व दृढ इच्छाशक्ति है और इन गुणों के साथ वे पंचायत से लेकर संसद तक देश की सेवा कर रही हैं । आज के वक्त में पत्रकारिता एक चुनौति पूर्ण कार्य व कठिन काम हैं फिर भी महिलाएं अपनी योग्यता व साहस के साथ ही लोक हितों के प्रति करुणा व दया के भावों के कारण इस चुनौतिपूर्ण कार्य को सफलता पूर्वक कर रही हैं ।
नारी पर जुल्म करना एक अपराध है व उसे सहन करना उससे भी बडा अपराध है । नारी कोई पैर की जूती नहीं है । वह कुशल गृहणी , गृह लक्ष्मी ,मां , दुर्गा व सरस्वती हैं । वह वंदनीय , पूज्यनीय हैं । घर परिवार को एकता के सूत्र में पिरोए रखती है । फिर भी उफ तक नहीं करती है । घर में सबसे पहलें उठती है व सबसे बाद में सोती है । वह परिवार के हर सदस्य की फरमाइश का ध्यान रखती है । स्वादिष्ट व्यंजन बनाती हैं तभी तो उसे अन्नपूर्णा कहा जाता है । फिर उस पर जुल्म व अत्याचार क्यों ?

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